समस्तीपुर, खम्हार। दुर्गा पूजा के पावन अवसर पर जगतारिणी उत्क्रमित उच्चतर माध्यमिक विद्यालय खम्हार में शनिवार को भव्य एवं रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। विद्यालय प्रांगण में आयोजित इस कार्यक्रम में छात्राओं ने विभिन्न प्रस्तुतियों के माध्यम से माता दुर्गा की महिमा का वर्णन करते हुए समाज में व्याप्त कुरीतियों पर भी करारा प्रहार किया।
कार्यक्रम की शुरुआत दुर्गा पूजा की झांकी से हुई। शिक्षिका सुमन सौरभ के नेतृत्व में बच्चियों ने माता दुर्गा के नौ रूपों की झांकी प्रस्तुत की। इसमें शक्ति और भक्ति का ऐसा अद्भुत संगम देखने को मिला कि उपस्थित दर्शक भावविभोर हो उठे। झांकी में नव दुर्गा ने नारी शक्ति का संदेश देते हुए समाज सुधार की अपील की।
छात्राओं ने नृत्य-नाट्य के माध्यम से दहेज प्रथा, जातिवाद, प्रदूषण, भेदभाव, भ्रष्टाचार, गरीबी, बेरोज़गारी, अशिक्षा और जनसंख्या वृद्धि जैसी सामाजिक बुराइयों पर कटाक्ष किया। उनका संदेश था कि यदि इन बुराइयों का उन्मूलन हो जाए, तो समाज अधिक समृद्ध और सुरक्षित बन सकता है। इस प्रस्तुति को दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से सराहा।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण महिषासुर वध की झांकी रही। छात्राओं ने बड़ी ही प्रभावशाली ढंग से महिषासुर का वध कर देवी शक्ति की विजय का चित्रण किया। इसके बाद पूरे विद्यालय परिसर में सामूहिक आरती का आयोजन हुआ। ध्वनि और संगीत के बीच श्रद्धा और उत्साह का वातावरण देखते ही बन रहा था।
इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाध्यापक अरूण ठाकुर, प्रधानाध्यापिका आरती आनंद, तथा समस्त शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रहे। विद्यालय परिवार के साथ-साथ बड़ी संख्या में ग्रामीण और बच्चे-बच्चियां भी कार्यक्रम का आनंद लेने पहुंचे। सभी ने छात्राओं की प्रस्तुतियों की प्रशंसा करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
सांस्कृतिक कार्यक्रम के अंतर्गत छात्राओं ने लोकगीत और भक्ति गीत प्रस्तुत किए। साथ ही पारंपरिक व आधुनिक नृत्य ने भी दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पूरा विद्यालय प्रांगण तालियों और जयकारों से गूंज उठा।
इस कार्यक्रम का मूल उद्देश्य न केवल धार्मिक आस्था को प्रकट करना था, बल्कि समाज सुधार का संदेश देना भी रहा। बच्चियों ने यह स्पष्ट कर दिया कि नारी शक्ति केवल पूजा की मूर्ति नहीं, बल्कि समाज परिवर्तन की प्रेरणा भी है।
कुल मिलाकर, जगतारिणी उत्क्रमित उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, खम्हार का यह कार्यक्रम श्रद्धा, भक्ति और सामाजिक संदेश का अद्वितीय संगम रहा, जिसने सभी दर्शकों को प्रभावित किया।
