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वंचित बेटियों में जगी शिक्षा की नई रोशनी, प्रधान शिक्षिका के प्रयास से क्षेत्र की बच्चियों में फिर जागी पढ़ने की ललक

कस्बा (पूर्णिया)। शिक्षा के प्रति जागरूकता का सकारात्मक उदाहरण, प्राथमिक विद्यालय पार्षद टोला, मजगामा, कस्बा (पूर्णिया) की प्रधान शिक्षिका ज्योति...

कस्बा (पूर्णिया)। शिक्षा के प्रति जागरूकता का सकारात्मक उदाहरण, प्राथमिक विद्यालय पार्षद टोला, मजगामा, कस्बा (पूर्णिया) की प्रधान शिक्षिका ज्योति कुमारी ने अपने सतत प्रयासों और संवेदनशील पहल से पोषक क्षेत्र की वंचित बच्चियों के जीवन में नई उम्मीद जगा दी है। जिन बच्चियों ने पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण पढ़ाई बीच में छोड़ दी थी, आज वही बच्चियां फिर से स्कूल लौटने की इच्छा जता रही हैं।

परिवार की जिम्मेदारियों ने रोकी थी पढ़ाई

पोषक क्षेत्र के कई वंचित परिवारों में बेटियों पर घर की जिम्मेदारियां कम उम्र में ही आ जाती हैं। छोटे भाई-बहनों की देखभाल, घरेलू कामकाज और आर्थिक तंगी के कारण अनेक बच्चियां अपनी पढ़ाई जारी नहीं रख पातीं। परिणामस्वरूप उनकी शिक्षा अधूरी रह जाती है और भविष्य के सपने धुंधले पड़ जाते हैं।

मैम, क्या हमलोग भी पढ़ सकते हैं?” — मासूम सवाल

प्रधान शिक्षिका ज्योति कुमारी बताती हैं कि क्षेत्र भ्रमण के दौरान कई बच्चियां उन्हें रोककर संकोच भरे स्वर में पूछती थीं, “मैम, क्या हमलोग भी पढ़ सकते हैं?” यह प्रश्न उनके मन को गहराई से छू जाता था। शुरुआत में ये बच्चियां खुलकर बात करने से कतराती थीं, लेकिन लगातार संवाद और भरोसे ने उनके मन की झिझक को दूर कर दिया।

घर-घर पहुंचकर जगाई शिक्षा की अलख

ज्योति कुमारी ने पोषक क्षेत्र में नियमित भ्रमण कर अभिभावकों से संवाद स्थापित किया। उन्होंने शिक्षा के महत्व को समझाया और बेटियों को विद्यालय भेजने के लिए प्रेरित किया। उनके सतत प्रयासों का असर यह हुआ कि बच्चियों में आत्मविश्वास बढ़ा और उन्होंने स्वयं विद्यालय आकर पढ़ने की इच्छा जताई।

विद्यालय से जुड़ने की बढ़ी उत्सुकता

अब स्थिति यह है कि वही बच्चियां जो पहले बोलने से हिचकती थीं, सीधे विद्यालय पहुंचकर पढ़ाने की बात करती हैं। उनमें पढ़ाई के प्रति जागरूकता और उत्साह देखकर विद्यालय परिवार भी उत्साहित है। प्रधान शिक्षिका के अनुसार, इन बच्चियों की आंखों में अपने सपनों को साकार करने की चमक साफ दिखाई देती है।

समाज के लिए प्रेरणादायक पहल

यह पहल न केवल विद्यालय के लिए बल्कि पूरे समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है। शिक्षा से ही सशक्तिकरण का मार्ग प्रशस्त होता है। यदि बेटियां पढ़ेंगी तो परिवार और समाज दोनों सशक्त होंगे।

प्रधान शिक्षिका ज्योति कुमारी का मानना है कि हर बच्ची को शिक्षा का अधिकार है और उसे किसी भी परिस्थिति में इससे वंचित नहीं होना चाहिए। उनके प्रयासों से पोषक क्षेत्र में शिक्षा की नई किरण फूटी है, जो आने वाले समय में कई बेटियों के जीवन को रोशन करेगी।

न्यूज़ डेस्क

Author at DUMRAON NEWS EXPRESS

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