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डायट फारबिसगंज के प्राचार्य आफताब आलम : श्रेष्ठ नेतृत्व और आदर्श प्रबंधन का उत्कृष्ट प्रतीक

लेखक – धीरज सिंह, विज्ञान शिक्षक, राजकीय शिक्षक सम्मान 2025 से सम्मानित, सदस्य – जिला तकनीकी टीम फारबिसगंज, अररिया। जिला...

लेखक – धीरज सिंह, विज्ञान शिक्षक, राजकीय शिक्षक सम्मान 2025 से सम्मानित, सदस्य – जिला तकनीकी टीम

फारबिसगंज, अररिया। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) फारबिसगंज, अररिया अपनी कार्यशैली, प्रशिक्षण व्यवस्था और शैक्षणिक अनुशासन के कारण आज पूरे जिले में एक विशिष्ट पहचान बना चुका है। इस संस्थान को नई दिशा, बेहतर व्यवस्था और प्रेरणादायी वातावरण प्रदान करने का श्रेय इसके प्राचार्य श्री आफताब आलम को जाता है। उनके नेतृत्व में डायट फारबिसगंज ने प्रशिक्षण, प्रबंधन, नवाचार और शैक्षणिक गुणवत्ता के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की हैं।

मैं, धीरज सिंह, विज्ञान शिक्षक तथा जिला तकनीकी टीम का सदस्य होने के नाते, जब भी इस संस्थान में प्रवेश करता हूँ, एक अलग ऊर्जा, अनुशासन और सौंदर्य का अनुभव करता हूँ। पूरे परिसर की पर्यावरणीय सुंदरता, स्वच्छता और सुसंयोजित व्यवस्था देखकर स्पष्ट होता है कि यहाँ हर कार्य सोच-समझकर योजना के अनुसार किया जाता है। विभिन्न प्रखंडों से आने वाले प्रशिक्षुओं के लिए जो सरल, सुव्यवस्थित और मानवीय प्रशिक्षण व्यवस्था बनाई गई है, वह वास्तव में काबिले-तारीफ है।

प्रशिक्षण में उपयोग होने वाली आधुनिक तकनीकों—स्मार्ट बोर्ड, डिजिटल कंटेंट, सक्रिय शिक्षण विधियाँ, ICT आधारित प्रस्तुतियाँ और अन्य नवाचार—इन सबका प्रभावी उपयोग यहाँ की फैकल्टी टीम बहुत उत्कृष्ट रूप से करती है। पूरे स्टाफ की कार्यशैली यह दर्शाती है कि प्राचार्य आलम सर ने अपनी टीम को सही दिशा, आत्मविश्वास और कार्य-संस्कृति प्रदान की है।

आफताब आलम सर : एक आदर्श प्राचार्य के सभी उत्कृष्ट गुणों से सम्पन्न

जब भी मेरी उनसे मुलाकात होती है, मैं महसूस करता हूँ कि उनमें एक आदर्श प्राचार्य के वे सभी गुण विद्यमान हैं जो किसी भी शैक्षणिक संस्थान को ऊँचाई तक ले जाते हैं। वे प्रेरणादायी नेतृत्व के धनी हैं। संस्थान की हर गतिविधि, हर योजना और हर निर्णय में उनकी दूरदर्शिता, सजगता और सकारात्मक दृष्टिकोण स्पष्ट दिखाई देता है।

  1. अनुशासनप्रिय और आदर्श कार्यसंस्कृति के धनी

आलम सर स्वयं अनुशासन का पालन करते हैं और वही अनुशासन पूरे संस्थान में सहज रूप से दिखाई देता है। बिना किसी कठोरता के, वे कर्मचारियों और प्रशिक्षुओं दोनों को ऐसा वातावरण प्रदान करते हैं जहाँ हर व्यक्ति जिम्मेदारी के साथ अपना कार्य करता है।

  1. मृदुभाषी, विनम्र और संतुलित व्यक्तित्व

उनकी विनम्रता सबसे प्रभावशाली गुणों में से एक है। वे प्रशिक्षकों, फैकल्टी सदस्यों और कॉलेज के स्टाफ से इतने सम्मानित, संतुलित और सौम्य व्यवहार से मिलते हैं कि लोग स्वाभाविक रूप से प्रेरित हो जाते हैं। आज के समय में नेतृत्व के साथ ऐसी विनम्रता मिलना अत्यंत दुर्लभ है।

  1. दूरदर्शी सोच, गुणवत्ता सुधार का स्पष्ट विज़न

कॉलेज के विकास और शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार के लिए उनके पास एक स्पष्ट विज़न है। आधुनिक शिक्षण तकनीकों का समावेश, शिक्षक प्रशिक्षण के नए आयाम, और प्रशिक्षकों को नवाचार के लिए प्रेरित करना—ये सब उनके नेतृत्व की दूरदर्शिता को प्रदर्शित करते हैं।

  1. न्यायप्रिय और शांत स्वभाव के धनी

जब भी कोई समस्या सामने आती है, सर अत्यंत शांत चित्त से उसे सुनते हैं। बिना पूर्वाग्रह के, परिस्थिति का विश्लेषण कर न्यायपूर्ण निर्णय देने की उनकी क्षमता अद्भुत है। यही कारण है कि संस्थान में एक सकारात्मक और सुरक्षित कार्य वातावरण बना हुआ है।

  1. सहानुभूति और संवेदनशीलता

प्रशिक्षण में आने वाले शिक्षक अनेक प्रकार की समस्याएँ लेकर आते हैं। आलम सर हर समस्या को गहराई से सुनते हैं, समझते हैं और समाधान देते हैं। उनकी संवेदनशीलता प्रशिक्षुओं के मन में विश्वास और सम्मान पैदा करती है, जो किसी भी प्रशिक्षण संस्थान की सफलता की आधारशिला होती है।

  1. सकारात्मक और ऊर्जावान व्यक्तित्व

संस्थान में होने वाली हर गतिविधि—चाहे वह शिक्षण प्रशिक्षण हो, कार्यशाला हो, निरीक्षण हो, या तकनीकी उपयोग—सबमें सर की ऊर्जा और सकारात्मकता दिखाई देती है। वे हर कार्य को व्यवस्थित, प्रभावी और समयबद्ध तरीके से संपन्न करवाते हैं।

  1. शिक्षा के प्रति सच्ची निष्ठा और मूल्य-आधारित कार्यशैली

आज के समय में शिक्षा के क्षेत्र में नैतिकता का महत्व अत्यधिक बढ़ गया है। आलम सर की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वे शिक्षा को केवल दायित्व नहीं, बल्कि समर्पण मानते हैं। उनकी कार्यशैली पारदर्शिता, ईमानदारी, और मूल्य-आधारित निर्णयों पर आधारित है। यह गुण उन्हें अन्य संस्थानों के अनेक प्राचार्यों से अलग और श्रेष्ठ बनाता है।
डायट फारबिसगंज: बिहार में शैक्षणिक सुधार का एक मॉडल

यदि बिहार के सभी प्रशिक्षण संस्थान, डायट फारबिसगंज की तरह ही कार्य करने लगें—

आधुनिक तकनीकी उपयोग,

अनुशासित और सकारात्मक वातावरण,

प्रशिक्षकों का सम्मान,

समस्याओं का संवेदनशील समाधान,

और दूरदर्शी प्रबंधन—

तो निश्चित रूप से बिहार की शिक्षा व्यवस्था में एक क्रांतिकारी सुधार संभव है।
प्रशिक्षित शिक्षक अपने–अपने विद्यालय जाकर बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देंगे। इससे न केवल विद्यालयों का स्तर ऊँचा होगा, बल्कि पूरे राज्य में शिक्षा का नया अध्याय लिखा जाएगा।
प्राचार्य आफताब आलम सर जैसे नेतृत्वकर्ता किसी भी संस्थान के लिए सौभाग्य होते हैं। उनका विनम्र स्वभाव, दूरदर्शिता, अनुशासन, तकनीकी समझ और शिक्षा के प्रति सच्ची निष्ठा डायट फारबिसगंज को एक आदर्श प्रशिक्षण संस्थान के रूप में स्थापित कर रही है।

उनके सान्निध्य में कार्य कर रहे प्रशिक्षक और शिक्षक स्वयं को सौभाग्यशाली मानते हैं। मैं भी उनमें प्रेरणा का एक अमूल्य स्रोत देखता हूँ।

बिहार की शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में ऐसे प्राचार्यों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

धन्यवाद।
धीरज सिंह
विज्ञान शिक्षक
राजकीय शिक्षक सम्मान 2025 से सम्मानित
मध्य विद्यालय, नोनिया टोला, चकला नरपतगंज, अररिया

न्यूज़ डेस्क

Author at DUMRAON NEWS EXPRESS

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