पूर्णियाँ। विश्व आर्द्रभूमि दिवस के अवसर पर प्राथमिक विद्यालय पार्षद टोला मजगामा कस्बा, पूर्णियाँ में पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक सराहनीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विद्यालय की प्रधान शिक्षिका ज्योति कुमारी के नेतृत्व में बाल संसद के सदस्यों ने विद्यालय परिसर में स्थित बागवानी क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के फूलों के पौधे लगाए। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों में प्रकृति, पर्यावरण और आर्द्रभूमियों के संरक्षण के प्रति जागरूकता पैदा करना था।
आर्द्रभूमि संरक्षण का दिया गया संदेश
कार्यक्रम की शुरुआत विश्व आर्द्रभूमि दिवस के महत्व पर चर्चा से हुई। प्रधान शिक्षिका ज्योति कुमारी ने बच्चों को सरल भाषा में बताया कि आर्द्रभूमियाँ जैसे तालाब, झील, नदी के किनारे और दलदली क्षेत्र हमारे पर्यावरण के लिए कितने आवश्यक हैं। ये न केवल जल संरक्षण में सहायक होती हैं, बल्कि जैव विविधता को भी बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कहा कि पौधारोपण जैसे छोटे-छोटे प्रयासों से भी हम प्रकृति की रक्षा कर सकते हैं।
बाल संसद की सक्रिय भागीदारी
इस अवसर पर बाल संसद के सदस्यों ने पूरे उत्साह के साथ कार्यक्रम में भाग लिया। बच्चों ने गेंदा, गुलाब, सदाबहार और अन्य मौसमी फूलों के पौधे लगाए। पौधारोपण के दौरान बच्चों ने यह संकल्प लिया कि वे लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल करेंगे और उन्हें सुरक्षित रखेंगे। बाल संसद के सदस्यों ने यह भी संदेश दिया कि स्वच्छ और हरा-भरा वातावरण ही स्वस्थ जीवन की आधारशिला है।
शिक्षा के साथ संस्कारों का विकास
विद्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम ने यह साबित किया कि शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यवहारिक गतिविधियों के माध्यम से बच्चों में जिम्मेदारी और संवेदनशीलता का विकास भी आवश्यक है। शिक्षकों ने बच्चों को बताया कि पौधारोपण से न केवल विद्यालय का वातावरण सुंदर होता है, बल्कि बच्चों में प्रकृति के प्रति प्रेम और संरक्षण की भावना भी विकसित होती है।
स्थानीय समुदाय के लिए प्रेरणा
विश्व आर्द्रभूमि दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम स्थानीय समुदाय के लिए भी प्रेरणास्रोत बना। विद्यालय परिवार ने उम्मीद जताई कि ऐसे आयोजनों से समाज में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और लोग अधिक से अधिक पौधे लगाकर प्रकृति को सुरक्षित रखने में अपना योगदान देंगे।