बंजरिया, पूर्वी चंपारण। शारदीय नवरात्र के अवसर पर रविवार को रा.उ.मा.वि. सिसवा हिंदी बंजरिया में झिझिया नृत्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। विद्यालय परिवार के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम का नेतृत्व शिक्षक मो. सगीर अख्तर ने किया। छात्र-छात्राओं एवं ग्रामीण महिलाओं ने उत्साहपूर्वक इसमें भाग लिया।
झिझिया (या झिझरी) मिथिला क्षेत्र का प्रमुख सांस्कृतिक नृत्य है, जिसकी परंपरा बिहार और नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में शताब्दियों से चली आ रही है। शारदीय नवरात्र के दौरान महिलाएँ सिर पर छिद्रयुक्त घड़ा (झिझिया) लेकर नाचती हैं, जिसके भीतर दीपक जलता रहता है। यह नृत्य देवी दुर्गा को समर्पित होता है और इसका उद्देश्य परिवार को बुरी शक्तियों, डायनों और काले जादू से सुरक्षित रखना तथा समाज में शांति और सद्भाव का संदेश देना है।
विद्यालय परिसर में प्रस्तुत इस झिझिया नृत्य में छात्राओं ने रंग-बिरंगे परिधानों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की थाप पर देवी गीत गाकर समां बांधा। दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। इस अवसर पर स्थानीय ग्रामीण भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
प्रधानाध्यापक रविशंकर प्रसाद ने बताया कि यह लोकनृत्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि हमारी संस्कृति और परंपरा की धरोहर है। इसके माध्यम से न केवल धार्मिक आस्था व्यक्त होती है, बल्कि सामाजिक बुराइयों के खिलाफ जागरूकता भी फैलाई जाती है। उन्होंने कहा कि आज के बदलते दौर में झिझिया नृत्य की लोकप्रियता कम हो रही है, इसलिए विद्यालय स्तर पर इस तरह के आयोजन से नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
कार्यक्रम का समापन देवी दुर्गा की आराधना और समाज में भाईचारे एवं सद्भावना की कामना के साथ हुआ।

