डुमरांव। जंगल बाजार रोड स्थित बड़ी संघत उदासीन मठिया में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का भव्य शुभारंभ अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ हुआ। गणमान्य संतों एवं विद्वान कथा व्यास की उपस्थिति में प्रथम दिवस की कथा ने श्रद्धालुओं के मन को भक्ति रस से सराबोर कर दिया। कथा के दौरान पूरा परिसर “जय श्रीकृष्ण” के जयघोष से गूंजता रहा और वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा।
प्रथम दिवस की कथा : भागवत और संतों की महिमा
प्रथम दिवस की कथा में श्रीमद् भागवत के महत्व, संतों की महिमा तथा गोकर्णोपाख्यान की प्रेरक कथा का विस्तृत वर्णन किया गया। कथा व्यास ने बताया कि श्रीमद् भागवत केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाला दिव्य मार्गदर्शक है। इसके श्रवण से मनुष्य के अंतःकरण में शुद्धता आती है और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन होता है। उन्होंने कहा कि भागवत कथा मानव को सत्य, धर्म, करुणा और प्रेम के मार्ग पर अग्रसर करती है।
कलियुग में भागवत कथा का महत्व
कथा व्यास ने अपने प्रवचन में कहा कि कलियुग में भक्ति का मार्ग सबसे सरल और प्रभावी है, और श्रीमद् भागवत कथा इसी भक्ति मार्ग का सर्वोत्तम माध्यम है। भागवत के श्रवण मात्र से मनुष्य के पापों का क्षय होता है और आत्मिक शांति की अनुभूति होती है। उन्होंने श्रद्धालुओं से नियमित रूप से धर्म, सत्संग और सदाचार को अपनाने का आह्वान किया।
संतों की महिमा और गोकर्णोपाख्यान
कथा के दौरान संतों की महिमा पर विशेष प्रकाश डाला गया। कथा व्यास ने कहा कि संत समाज के लिए प्रकाश स्तंभ के समान होते हैं, जो अज्ञान के अंधकार को दूर कर ज्ञान का दीप जलाते हैं। इसके पश्चात गोकर्णोपाख्यान की कथा सुनाई गई, जिसमें भक्ति, श्रद्धा और विश्वास के महत्व को सरल और प्रभावी उदाहरणों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। कथा सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे और भक्ति गीतों में सहभागी बने।
श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़
कथा के पहले ही दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति देखने को मिली। स्थानीय लोगों के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों से भी भक्त कथा श्रवण के लिए पहुंचे। महिलाओं, पुरुषों और युवाओं की समान भागीदारी ने आयोजन को और अधिक भव्य बना दिया। मठिया परिसर में अनुशासन, शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का विशेष अनुभव किया गया।
28 जनवरी को होगा समापन
आयोजक मंडल ने जानकारी दी कि यह श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ प्रतिदिन आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम का समापन 28 जनवरी को विधि-विधान के साथ पूर्णाहुति एवं विशाल भंडारे के आयोजन के साथ किया जाएगा। आयोजकों ने क्षेत्र के सभी श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर कथा श्रवण करने का आग्रह किया है।
आयोजन का उद्देश्य और आयोजक मंडल
आयोजन समिति के अनुसार इस धार्मिक अनुष्ठान का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में आध्यात्मिक चेतना, नैतिक मूल्यों और संस्कारों का प्रसार करना है, ताकि समाज में सद्भाव, शांति और भाईचारे की भावना को और अधिक सुदृढ़ किया जा सके। इस आयोजन में अध्यक्ष विकास ठाकुर, सचिव अरविंद सिन्हा, कोषाध्यक्ष मनु जी के साथ सोनू ठाकुर, अजय यादव, कन्हैया तिवारी, मनीष मिश्रा, मंटू यादव एवं मनीष सहित अन्य सदस्य सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। आयोजकों के समर्पण से यह आयोजन क्षेत्र के लिए एक यादगार आध्यात्मिक पर्व बनता जा रहा है।