पटना। दृष्टि बाधितों के मसीहा एवं ब्रेल विधि के जनक महान समाज सुधारक लुईस ब्रेल की 217वीं जयंती रविवार, 4 जनवरी 2026 को विधान परिषद सभागार में भव्य समारोह के साथ मनाई गई। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में बिहार के प्रसिद्ध राजनेताओं, शिक्षाविदों, समाजसेवियों, दृष्टिबाधित विद्यार्थियों तथा मीडिया कर्मियों की बड़ी उपस्थिति रही, जिससे सभागार खचाखच भरा रहा।
समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ अशोक चौधरी, माननीय मंत्री पथ निर्माण विभाग बिहार सरकार, श्री श्रवण कुमार, माननीय मंत्री ग्रामीण विकास विभाग बिहार सरकार, श्री श्याम रजक विधायक एवं पूर्व मंत्री, श्री चंदेश्वर चंद्रवंशी पूर्व सांसद, बिहार के प्रख्यात हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ अजय कुमार निदेशक निरामया हॉस्पिटल पटना, प्रोफेसर डॉ डॉली सिन्हा (पटना विश्वविद्यालय एवं ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय), कुमारी जूली सिन्हा सचिव ब्रेली इंस्टीट्यूट ऑफ रिसर्च एंड ट्रेनिंग पटना, श्री विजय कुमार भास्कर प्रभारी समावेशी शिक्षा विभाग, राज्य शिक्षा शोध एवं प्रशिक्षण परिषद, महेंद्रु पटना सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन सभी मुख्य अतिथियों द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया।
मंच संचालन डॉ श्रवण कुमार, व्याख्याता डायट विक्रम ने किया। अपने संबोधन में वक्ताओं ने कहा कि लुईस ब्रेल ने दृष्टि बाधितों के जीवन में शिक्षा का उजाला फैलाने का जो ऐतिहासिक कार्य किया, वह मानवता के लिए अमूल्य योगदान है। ब्रेल विधि के माध्यम से दृष्टिबाधितों को पढ़ने-लिखने और आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला, जिसने उनके जीवन की दिशा बदल दी।
इस अवसर पर पीएम श्री उच्च माध्यमिक विद्यालय पटना के शिक्षक एवं बिहार राज्य शिक्षक पुरस्कार 2025 से सम्मानित श्री विल्फ्रेड हेनरी ने लुईस ब्रेल के जीवन पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि मात्र तीन वर्ष की आयु में एक दुर्घटना के कारण लुईस ब्रेल दृष्टिबाधित हो गए थे। बावजूद इसके, उन्होंने अपनी अद्भुत प्रतिभा और दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर मात्र 12 वर्ष की आयु में छह बिंदुओं वाली ब्रेल लिपि का आविष्कार किया। यह विधि आगे चलकर विश्वभर में दृष्टिबाधितों के लिए शिक्षा का आधार बनी और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला। फ्रांस में उनकी मृत्यु के बाद उन्हें राष्ट्रीय सम्मान से भी नवाजा गया।
समारोह के दौरान माननीय मंत्री श्री श्रवण कुमार ने अनेक दृष्टिबाधित बच्चों, बच्चियों एवं बुजुर्गों को अपने हाथों से कंबल उपहार स्वरूप प्रदान किए। कंबल पाकर दृष्टिबाधितों के चेहरे खुशी से खिल उठे। वहीं कुमारी जूली सिन्हा द्वारा सभी दृष्टिबाधितों को सुंदर कलम एवं जलपान भी प्रदान किया गया। लगभग तीन घंटे चले इस कार्यक्रम में शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को पुरस्कार एवं प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।
मंत्री ग्रामीण विकास विभाग श्री श्रवण कुमार ने अपने संबोधन में घोषणा की कि राज्य सरकार शीघ्र ही दृष्टिबाधितों के लिए एक उच्च कोटि का विद्यालय खोलने की दिशा में कार्य कर रही है। इससे दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त होगी।
कार्यक्रम के अंत में उत्कृष्ट भाषण के लिए श्री विल्फ्रेड हेनरी को कुमारी जूली सिन्हा एवं विजय कुमार भास्कर द्वारा संयुक्त रूप से प्रशस्ति पत्र, पुष्पगुच्छ एवं अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। समापन सत्र में विजय कुमार भास्कर एवं कुमारी जूली सिन्हा ने संयुक्त रूप से धन्यवाद ज्ञापन करते हुए सभी अतिथियों एवं आगंतुकों के प्रति आभार प्रकट किया।
