शिक्षा को संस्कारों से जोड़ने पर दिया गया विशेष जोर
डुमरांव। वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में नैतिक मूल्यों, संस्कारों और भावनात्मक संवेदनशीलता के महत्व को रेखांकित करने के उद्देश्य से एक दिवसीय सेमिनार सह शाहाबाद शिक्षक सम्मान समारोह का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य विषय “संस्कार, संस्कृति व भावनाएं” रहा, जिसमें बिहार के विभिन्न जिलों से आए शिक्षाविदों, शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं शिक्षा प्रेमियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। आयोजन के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज निर्माण का सशक्त आधार है।
गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति
समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में नवनीत सिंह (व्याख्याता, डायट), डॉ. राजू मोची (पूर्व प्राचार्य, डी.के. कॉलेज, डुमरांव), डॉ. शोभा सिंह (प्राचार्य, सुमित्रा महिला कॉलेज, डुमरांव) तथा डॉ. विनोद कुमार सिंह (सीनेट सदस्य सह व्याख्याता, डी.के. कॉलेज, डुमरांव) उपस्थित रहे। अतिथियों ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया और शिक्षा के साथ संस्कारों के समन्वय पर अपने विचार साझा किए। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि जिम्मेदार, संवेदनशील और संस्कारित नागरिकों का निर्माण होना चाहिए।
सरस्वती वंदना व सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
कार्यक्रम की शुरुआत विल्फ्रेड हेनरी द्वारा प्रस्तुत भावपूर्ण सरस्वती वंदना से हुई, जिसने पूरे सभागार को आध्यात्मिक वातावरण से भर दिया। इसके उपरांत कुमारी आरती सिंह (गया जी) एवं डॉ. अमृता कुमारी (भागलपुर) द्वारा प्रस्तुत स्वागत गीत ने उपस्थित अतिथियों और प्रतिभागियों का मन मोह लिया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने शिक्षा और संस्कृति के आपसी संबंध को प्रभावी ढंग से दर्शाया।
कुशल मंच संचालन से बढ़ी कार्यक्रम की गरिमा
पूरे कार्यक्रम का सधे हुए ढंग से मंच संचालन नीतू जालान (भागलपुर) एवं तबरेज आलम (डुमरांव) ने संयुक्त रूप से किया। दोनों संचालकों ने कार्यक्रम की प्रत्येक कड़ी को समयबद्ध, शालीन एवं प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत कर समारोह की गरिमा को और ऊंचाई दी।
राज्य के विभिन्न जिलों से पहुंचे शिक्षक-शिक्षिकाएं
सेमिनार में समस्तीपुर, मधुबनी, गया जी, बक्सर, भोजपुर, रोहतास, कैमूर, गोपालगंज, अररिया एवं भागलपुर सहित बिहार के कई जिलों से बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाएं शामिल हुईं। प्रतिभागियों ने आपसी संवाद के माध्यम से शैक्षणिक अनुभव साझा किए तथा शिक्षा में संस्कारों की भूमिका पर गंभीर मंथन किया। यह सेमिनार शिक्षकों के लिए विचार-विमर्श और प्रेरणा का सशक्त मंच साबित हुआ।
राजकीय शिक्षक पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों का हुआ सम्मान
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण बिहार के विभिन्न जिलों के राजकीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक-शिक्षिकाओं का सम्मान समारोह रहा। अतिथियों द्वारा सभी सम्मानित शिक्षकों को अंगवस्त्र, स्मृति चिन्ह एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान कर उनके उत्कृष्ट शैक्षणिक योगदान की सराहना की गई। वक्ताओं ने कहा कि ऐसे सम्मान समारोह शिक्षकों के मनोबल को बढ़ाते हैं और उन्हें समाज के प्रति अपने दायित्वों को और अधिक निष्ठा से निभाने की प्रेरणा देते हैं।
प्रमुख रूप से —
धनंजय मिश्रा (राजपुर), अनुभूति वर्मा (खगड़िया), उषा कुमारी (मधुबनी), आरज़ू कुमारी (आरा), सुधीर कुमार सिंह (ब्रह्मपुर), दुर्गा मांगे (बक्सर), सुनीता कुमारी (कोरान सराय) एवं मो. रहमतुल्लाह सहित विकास फैमिली क्लब परिवार व एक्टिव टीचर्स एंड स्टुडेंट फेसबुक ग्रुप के से जूडे सदस्य शामिल रहे।
आयोजन में संस्थाओं की रही अहम भूमिका
इस भव्य कार्यक्रम का आयोजन विकास फैमिली क्लब परिवार एवं एक्टिव टीचर्स एंड स्टूडेंट फेसबुक ग्रुप के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। आयोजक संस्था के संस्थापक मनोज कुमार मिश्रा ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संस्था का उद्देश्य शिक्षकों को सम्मान देने के साथ-साथ शिक्षा में सकारात्मक एवं मूल्यपरक परिवर्तन लाना है।
कार्यक्रम को सफल बनाने में राजेश वर्मा, मनोज कुमार, धीरज मिश्रा, मनीष मिश्रा, अनुज मिश्रा, सुनीता कुमारी, हरेराम एवं आकाश मिश्रा सहित पूरी आयोजन टीम का सराहनीय योगदान रहा।
प्रेरणादायक संदेश के साथ हुआ समापन
समापन सत्र में वक्ताओं ने कहा कि संस्कार, संस्कृति और भावनाओं से युक्त शिक्षा ही समाज को सही दिशा दे सकती है। शिक्षकों को समाज निर्माता बताते हुए उनके योगदान को नमन किया गया। धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। उपस्थित शिक्षक-शिक्षिकाओं ने इस आयोजन को अत्यंत प्रेरणादायक बताते हुए भविष्य में भी ऐसे शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया।