डुमरांव. नगर के चर्चित व महान कलाकार कृष्ण मुरारी की दूसरी पुण्यतिथि पर स्थानीय कलाकारों द्वारा उनके पैतृक निवास पर एक श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन किया गया. इस समारोह में मूर्तिकार भरत प्रसाद ने उनके परिजनों को गुरु घराना मानते हुए सम्मान किया.
उन्होंने कहां कि बड़े भाई एवं गुरु कृष्ण मुरारी का जीवन उभरते हुए कलाकारों को प्रोत्साहित करने में बीता. उनके सादगी भरे जीवन एवं व्यवहार को हम कभी भूल नहीं सकते. उनका हंसता हुआ चेहरा आज भी नजरों पर छाया रहता है. मैं और मेरा पूरा परिवार उन्हें कभी भूल नहीं सकता.समारोह में उनका भतीजा बबलू ने कहां कि उनके जैसे महान कलाकार का हमारे परिवार में जन्म लेना, हमारे परिवार के लिए गर्व की बात है.
हम लोगों ने उन पर कभी भी घरेलू एवं अन्य कार्य के लिए दबाव नहीं दिया. वह स्वतंत्र रूप से अपनी कला के प्रति समर्पित थे. पुराना भोजपुर निवासी कलाकार विजय लाल शर्मा ने उनके साथ बीती घटनाओं को याद करते हुए बताया कि मेरी उनसे पहली मुलाकात 1974 में राज हाई स्कूल के छात्र जीवन में हुई थी, जब मैं विद्यालय में आयोजित सरस्वती पूजा के लिए मूर्ति खरीदने गया था, मैं उनकी मूर्ति से इतना प्रभावित हुआ कि उन्हें पुराना भोजपुर में दुर्गा जी की मूर्ति बनवाने ले गया.
उनके द्वारा बनाई गई मूर्ति की सबों ने सराहना की. लगातार 15 वर्षों तक वह हमारी मूर्ति बनाएं. पैसे के अभाव में भी वह मूर्ति बना दिया करते थे. कभी-कभी वह पांच-छह दिनों तक मेरे घर ही रह जाते थे, वह मुझे भी मूर्ति बनाने के लिए प्रेरित किया करते थे. रंगकर्मी जितेंद्र कुमार, मनोज दुबे, काशीराम, विजय मिश्रा, मनोज कुमार ने उनके निधन को रंगकर्म के क्षेत्र में अर्पूणीय छति बताएं.
कृष्ण मुरारी न केवल मूर्तिकार बल्कि एक सधे हुए रंग कर्मी भी थे. पेंटिंग के क्षेत्र में उनके द्वारा मंदिरों पर बनाए गए चित्र उनकी कला को बयां करते थे. वह गीत एवं कव्वाली के मस्त शौकीन थे. वे अक्सर गुनगुनाया करते थे ’हमें तो लूट लिया मिलके हुस्न वालों ने’ जो कुछ भी हो डुमरांव कलाकारों की जन्म भूमि रहा है.
इसने ऐसे कलाकारों को जन्म दिया है, जो डुमरांव ही नहीं बल्कि देश, प्रदेश एवं विदेशों में भी अपनी कला से विशिष्ट पहचान बनाई है. यहां शहनाई वादक, मूर्तिकार, छविकार, रंगमंच, आकाशवाणी एवं दूरदर्शन कलाकार, संगीतकार, गायक, फनकार, साहित्यकार सहित कई विधाओं के सधे हुए कलाकारों ने जन्म लिया है.
जिसमें कृष्ण मुरारी की अपनी एक अलग छवि रही है. जिन्हें हम जीवन भर भुला नहीं सकते. मौके पर मूर्तिकार गोपीचंद, छोटक जी, गिरधारी, भरत, श्रीभगवान, किस्मत सहित पेंटर राजू एवं कृष्ण भूषण ने तैल्यचित्र पर पुष्पित कर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की.