शिक्षक सृजन, साहित्य और संवेदनाओं का प्रेरक संगम
पटना। बापू टावर संग्रहालय, पटना एवं ई-शिक्षा, सीतामढ़ी के संयुक्त तत्वावधान में पुस्तक अम्मा के लोकार्पण सह सृजन संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर अम्मा के साथ-साथ पूर्व प्रकाशित पुस्तकों जानकी की डायरी एवं शिक्षकों की कलम से का भी विधिवत विमोचन किया गया। यह आयोजन शिक्षक लेखन की निरंतर यात्रा और उसके सामाजिक सरोकारों को रेखांकित करने वाला एक महत्वपूर्ण साहित्यिक अवसर रहा।
मुख्य अतिथि विनय कुमार (आईएएस) की गरिमामयी उपस्थिति
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विनय कुमार (आईएएस), निदेशक रहे। उन्होंने तीनों पुस्तकों का संयुक्त रूप से लोकार्पण करते हुए कहा कि शिक्षक जब अपने अनुभवों को साहित्य का रूप देते हैं, तो वह समाज के लिए स्थायी धरोहर बन जाती है। उन्होंने ई-शिक्षा के प्रयासों की सराहना करते हुए इसे शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में अनुकरणीय पहल बताया।
बापू टावर प्रशासन व साहित्यकारों की सक्रिय सहभागिता
कार्यक्रम में ललित कुमार, उपनिदेशक, बापू टावर, कमल नाथ झा, रमेश चंद्रा, कुमारी गुड्डी, प्रत्युष मिश्रा, नीरज गुरू एवं सुधाकर सिन्हा की विशेष उपस्थिति रही। इनके साथ ही अम्मा, जानकी की डायरी एवं शिक्षकों की कलम से के लेखकगण भी कार्यक्रम में मौजूद रहे, जिससे आयोजन जीवंत और संवादपूर्ण बन सका।
संपादन, संयोजन और शिक्षकों की निरंतर सृजन यात्रा
कार्यक्रम की संपादक प्रियंका प्रियदर्शिनी रहीं। पुस्तक अम्मा के संयोजन का कार्य राज्य शिक्षक पुरस्कार 2025 से सम्मानित शिक्षिका वीणा कुमारी, मध्य विद्यालय कोआही, रून्नीसैदपुर (सीतामढ़ी) ने किया। उन्होंने अपने संबोधन में बताया कि लगभग तीन वर्षों से लगातार शिक्षकों द्वारा लिखी पुस्तकों का प्रकाशन हो रहा है। उन्होंने गर्व के साथ कहा कि सीतामढ़ी बिहार का ऐसा जिला बन चुका है, जहां निरंतर तीन वर्षों से शिक्षकों की सामूहिक लेखनी से पुस्तकें प्रकाशित हो रही हैं। इस क्रम में पहली पुस्तक जानकी की डायरी, दूसरी शिक्षकों की कलम से और तीसरी अम्मा है।
ईई-शिक्षा की साहित्यिक पहल और सृजन संवाद
सृजन संवाद के दौरान ई-शिक्षा की साहित्यिक यात्रा पर विस्तार से चर्चा की गई। बताया गया कि वर्ष 2022 में ई-शिक्षा डिजिटल पत्रिका की शुरुआत के बाद यह पहल वर्ष दर वर्ष मजबूत होती गई। पुस्तकों के प्रकाशन ने शिक्षकों को लेखन के लिए प्रेरित किया और उन्हें अपनी संवेदनाओं, अनुभवों और विचारों को साझा करने का मंच प्रदान किया।
आभार एवं आगे की जानकारी
अंत में संपादक प्रियंका प्रियदर्शिनी ने बापू टावर पटना, ई-शिक्षा डिजिटल पत्रिका की टीम, उपस्थित सभी अतिथियों, लेखकगण एवं सहयोगियों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि सृजन संवाद की विस्तृत जानकारी शीघ्र ही ब्लॉग लेखन के माध्यम से साझा की जाएगी। समयाभाव एवं स्वास्थ्य कारणों से फिलहाल संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया गया है।
यह आयोजन शिक्षा, साहित्य और शिक्षक सृजन की शक्ति को रेखांकित करने वाला स्मरणीय कार्यक्रम सिद्ध हुआ।
