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घर-घर पहुंच रही शिक्षा : शिक्षिका सुषमा कुमारी का अनोखा प्रयास

झुलसे छात्र के पास पहुंचकर पढ़ाया, टीएलएम व नवाचार से बनीं प्रेरणा रियासी (जम्मू-कश्मीर)। सरकारी विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को...

झुलसे छात्र के पास पहुंचकर पढ़ाया, टीएलएम व नवाचार से बनीं प्रेरणा

रियासी (जम्मू-कश्मीर)। सरकारी विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन इन्हीं परिस्थितियों के बीच कुछ शिक्षक अपनी लगन और नवाचार से नई मिसाल कायम कर रहे हैं। ऐसा ही प्रेरणादायक उदाहरण सामने आया है रियासी जिले के जीएमएस कच्ची खैरा, तलवाड़ा से, जहां शिक्षिका सुषमा कुमारी ने अपने समर्पण और संवेदनशीलता का अनूठा परिचय दिया है।

झुलसे छात्र को घर जाकर दी शिक्षा

जानकारी के अनुसार, कक्षा यूकेजी के छात्र युवराज सिंह (पिता दिलीप सिंह, माता बबली देवी) का कुछ दिन पहले एक हादसे में चेहरा झुलस गया था, जिसके कारण वह विद्यालय आने में असमर्थ हो गया। ऐसी परिस्थिति में शिक्षिका सुषमा कुमारी ने मानवता और कर्तव्यनिष्ठा का उदाहरण पेश करते हुए विद्यालय समय के अतिरिक्त स्वयं छात्र के घर पहुंचकर उसे पढ़ाना शुरू किया। उनका यह कदम न केवल छात्र की पढ़ाई को निरंतर बनाए रखने में मददगार साबित हो रहा है, बल्कि समाज में शिक्षा के प्रति सकारात्मक संदेश भी दे रहा है।

टीएलएम और नवाचार से आसान बन रही पढ़ाई

सुषमा कुमारी केवल पारंपरिक शिक्षण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे टीएलएम (शिक्षण-अधिगम सामग्री) और विभिन्न नवाचारों के माध्यम से बच्चों को पढ़ाने में विश्वास रखती हैं। वे देर रात तक मेहनत कर आकर्षक और उपयोगी टीएलएम तैयार करती हैं, जिससे छोटे बच्चों को कठिन विषय भी सरल और रोचक तरीके से समझ में आते हैं। उनके द्वारा बनाए गए मॉडल, चार्ट और गतिविधि आधारित सामग्री बच्चों में सीखने की उत्सुकता बढ़ाते हैं।

छात्रों में बढ़ रही रुचि, अभिभावकों में खुशी

उनके इस प्रयास का असर साफ तौर पर देखने को मिल रहा है। छात्र पढ़ाई में अधिक रुचि लेने लगे हैं और अभिभावक भी शिक्षिका के समर्पण से बेहद खुश हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सुषमा कुमारी जैसे शिक्षक ही शिक्षा व्यवस्था की असली ताकत हैं, जो सीमित संसाधनों में भी बेहतर परिणाम दे रहे हैं।

समर्पण की मिसाल बनीं सुषमा कुमारी

आज के दौर में, जहां कई बार शिक्षक-छात्र संबंध औपचारिकता तक सीमित रह जाता है, वहीं सुषमा कुमारी ने यह साबित कर दिया है कि यदि शिक्षक ठान लें तो हर बच्चा शिक्षा से जुड़ सकता है। उनका यह प्रयास अन्य शिक्षकों के लिए भी प्रेरणा स्रोत बन रहा है।

सुषमा कुमारी का यह कदम शिक्षा के क्षेत्र में एक सकारात्मक बदलाव का संकेत है। झुलसे हुए छात्र तक घर-घर पहुंचकर शिक्षा देने की यह पहल न केवल एक बच्चे का भविष्य संवार रही है, बल्कि पूरे समाज में शिक्षा के महत्व को भी मजबूत कर रही है।

न्यूज़ डेस्क

Author at DUMRAON NEWS EXPRESS

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