प्रधान शिक्षिका ज्योति कुमारी की पहल, छात्रों में दिखा उत्साह
पूर्णिया। जिले के प्राथमिक विद्यालय पार्षद टोला, मजगामा कस्बा में शिक्षा के साथ-साथ जीवनोपयोगी ज्ञान देने की एक सराहनीय पहल देखने को मिली। विद्यालय की प्रधान शिक्षिका ज्योति कुमारी ने पोषक क्षेत्र भ्रमण के दौरान छात्र-छात्राओं को आपदा प्रबंधन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदान कीं। आमतौर पर यह जानकारी प्रत्येक शनिवार को विद्यालय परिसर में दी जाती है, लेकिन इस बार शिक्षिका ने नवाचार करते हुए बच्चों को वास्तविक परिवेश में ही आपदाओं से बचाव के तरीके समझाए।
मैदान में सिखाए गए व्यवहारिक उपाय
पोषक क्षेत्र में भ्रमण के दौरान बच्चों को बाढ़, आग, भूकंप, आंधी-तूफान जैसी प्राकृतिक और मानव जनित आपदाओं के बारे में विस्तार से बताया गया। प्रधान शिक्षिका ने सरल भाषा में समझाया कि आपदा के समय घबराना नहीं चाहिए, बल्कि धैर्य और समझदारी से काम लेना चाहिए। बच्चों को यह भी बताया गया कि सुरक्षित स्थान पर कैसे पहुंचें, प्राथमिक उपचार कैसे करें और जरूरत पड़ने पर आसपास के लोगों की मदद कैसे लें।
आपात स्थिति में सतर्कता पर जोर
शिक्षिका ज्योति कुमारी ने बच्चों को यह भी जानकारी दी कि किसी भी आपदा की स्थिति में सबसे पहले अपनी और दूसरों की सुरक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक है। उन्होंने बच्चों को स्थानीय प्रशासन और आपातकालीन सेवाओं के बारे में भी बताया तथा यह समझाया कि संकट के समय सही सूचना देना और मदद मांगना कितना महत्वपूर्ण होता है।
बच्चों में दिखा उत्साह और जिज्ञासा
इस अनोखे तरीके से पढ़ाई होने पर छात्र-छात्राओं में खासा उत्साह देखा गया। बच्चे न केवल ध्यानपूर्वक बातें सुनते नजर आए, बल्कि उन्होंने कई सवाल पूछकर अपनी जिज्ञासा भी प्रकट की। इस दौरान शिक्षिका ने बच्चों के सवालों का संतोषजनक जवाब देकर उनकी समझ को और मजबूत किया।
शिक्षा के साथ जीवन कौशल पर जोर
विद्यालय में इस तरह की पहल यह दर्शाती है कि अब शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि बच्चों को जीवन के हर पहलू के लिए तैयार किया जा रहा है। आपदा प्रबंधन जैसी महत्वपूर्ण जानकारी बच्चों को कम उम्र में ही मिलना उनके भविष्य के लिए बेहद लाभकारी साबित होगा।
स्थानीय स्तर पर सराही गई पहल
प्रधान शिक्षिका की इस पहल को स्थानीय अभिभावकों और ग्रामीणों ने भी सराहा है। उनका मानना है कि इस तरह के प्रयास बच्चों को जागरूक और आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इस कार्यक्रम के माध्यम से यह स्पष्ट हुआ कि यदि शिक्षकों की सोच सकारात्मक और नवाचारी हो, तो सीमित संसाधनों में भी बच्चों को बेहतर और उपयोगी शिक्षा दी जा सकती है।
