राज्य शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित ज्योति कुमारी कर रहीं जागरूकता की अगुवाई
पटना/पुर्णिया। माहवारी (मासिक धर्म) हर लड़की और महिला के जीवन की एक सामान्य और प्राकृतिक प्रक्रिया है, लेकिन आज भी समाज में इससे जुड़े मिथक, शर्म और संकोच इसके सही प्रबंधन में बड़ी बाधा बने हुए हैं। इस दिशा में प्राथमिक विद्यालय पार्षद टोला मजगामा, कस्बा, पूर्णिया की प्रधानाध्यापिका एवं राज्य शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित ज्योति कुमारी लगातार छात्राओं को माहवारी स्वच्छता को लेकर जागरूक करने का सराहनीय कार्य कर रही हैं।
छात्राओं को स्वच्छता और आत्मसम्मान का पाठ
ज्योति कुमारी विद्यालय में नियमित रूप से बच्चियों के साथ संवाद कर उन्हें माहवारी के दौरान स्वच्छता, सुरक्षित पैड के उपयोग, समय-समय पर पैड बदलने, शरीर और हाथों की सफाई जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी देती हैं। वे बच्चियों को यह भी समझाती हैं कि माहवारी कोई बीमारी नहीं, बल्कि एक पूरी तरह सामान्य जैविक प्रक्रिया है।
स्वच्छता की कमी से शिक्षा पर पड़ता है असर
मासिक धर्म के दौरान निजी शौचालय, साफ पानी और सुरक्षित निस्तारण की सुविधा न होने से कई छात्राएं स्कूल नहीं आ पातीं। इससे उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है। ज्योति कुमारी इस समस्या को गंभीरता से समझते हुए विद्यालय में स्वच्छता सुविधाओं को बेहतर बनाने और बच्चियों को आत्मविश्वास के साथ स्कूल आने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
मानसिक स्वास्थ्य को भी मिल रहा संबल
मासिक धर्म को लेकर समाज में व्याप्त शर्म और डर के कारण कई लड़कियों में आत्म-सम्मान की कमी, तनाव और असहजता देखी जाती है। प्रधानाध्यापिका द्वारा किए जा रहे खुले संवाद से छात्राओं में आत्मविश्वास बढ़ रहा है और वे अपनी समस्याएं बिना झिझक साझा कर पा रही हैं।
सुरक्षित पैड और साफ-सफाई पर दिया जा रहा विशेष जोर
कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चियों को सुरक्षित सैनिटरी पैड के उपयोग, पुराने कपड़ों के स्वच्छ प्रयोग, नियमित स्नान और हाथ धोने की आदत के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इससे बच्चियों को संक्रमण और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से बचाव में मदद मिल रही है।
समाज में बदलाव की मजबूत पहल
ज्योति कुमारी का मानना है कि जब तक माहवारी को लेकर समाज में खुली बातचीत नहीं होगी, तब तक लड़कियों को पूर्ण सम्मान और सुविधा नहीं मिल पाएगी। उनके प्रयासों से न केवल विद्यालय बल्कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है।
स्वच्छता से सशक्त बनती हैं बेटियां
माहवारी स्वच्छता अपनाने से लड़कियां शारीरिक रूप से स्वस्थ, मानसिक रूप से मजबूत और आत्मविश्वास से भरी बनती हैं। आज जरूरत है कि समाज इसे एक सामान्य प्रक्रिया के रूप में स्वीकार करे और हर बेटी को गरिमा के साथ जीवन जीने का अवसर दे।