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आवासित लगभग छह माह के बालिका को बांकुरा (पश्चिम बंगाल) के दंपति को दतक ग्रहण पूर्व पालक देख रेख (प्री-एडॉप्सन फोस्टर केयर) में दिया गया

बक्सर। जिला पदाधिकारी अंशुल अग्रवाल के द्वारा विशिष्ट दतक ग्रहण संस्थान बक्सर के निरीक्षण के क्रम में संस्थान में आवासित...

बक्सर। जिला पदाधिकारी अंशुल अग्रवाल के द्वारा विशिष्ट दतक ग्रहण संस्थान बक्सर के निरीक्षण के क्रम में संस्थान में आवासित लगभग 06 माह के बालिका को बांकुरा (पश्चिम बंगाल) के दम्पति को दतक ग्रहण पूर्व पालक देख रेख (प्री-एडॉप्सन फोस्टर केयर) में दिया गया। बालिका लगभग 06 माह पूर्व परित्यक्त अवस्था में पायी गयी थी। उसके जैविक माता-पिता की खोज करने हेतु समाचार पत्रों में विज्ञापन प्रकाशन करवया गया था। परंतु उसके माता पिता का पता नहीं चल पाया।

तत्पश्चात उसे महिला एवं बाल विकास मंत्रालय भारत सरकार के एडॉप्शन की साइट carings.wcd.gov.in पर पंजीकृत करवा दिया गया। बालिका को महिला एवं बाल विकास मंत्रालय भारत सरकार के द्वारा जारी दतक ग्रहण विनियम 2022 के प्रावधानों के आलोक में समस्त प्रक्रिया पूर्ण कर दतक ग्रहण हेतु प्रदान किया गया है। पश्चिम बंगाल के दंपति के द्वारा लगभग 3 वर्ष 06 माह पूर्व बच्चा गोद लेने हेतु पंजीकरण किया गया था। उनके द्वारा बालक को दतक ग्रहण में लेने हेतु सहमति दी गई। जिसके पश्चात दतक ग्रहण कमिटी की बैठक में दंपति के द्वारा समर्पित प्रमाण पत्रों एवं दतक ग्रहण हेतु उनके अभिरूचि की जाँच की गई और उन्हें दतक ग्रहण के लिए उपयुक्त पाया गया।

इसके बाद जिला दंडाधिकारी के न्यायालय में दतक ग्रहण आदेश के लिए आवेदन किया जाएगा। जिला पदाधिकारी के द्वारा दतक ग्रहण आदेश जारी करने के पश्चात ही दतक ग्रहण की प्रक्रिया पूर्ण होगी। जिला पदाधिकारी महोदय के द्वारा बच्चें को उपहार भी प्रदान किया गया।सहायक निदेशक के द्वारा संस्थान में वर्तमान में कुल 05 शिशु के आवासन की जानकारी दी गई। साथ ही सूचित किया गया कि सिकरौल थाना बक्सर के माध्यम से एसएनसीयू सदर अस्पताल बक्सर में इलाजरत शिशु को आज दिनांक 9 फरवरी 2024 को संस्थान में आवासित कराया गया है।

सहायक निदेशक द्वारा केंद्रीय दतक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण के द्वारा निवासी भारतीय भावी दत्तक माता-पिता के लिए राज्य और जोन वाइज दत्तक ग्रहण हेतु उपलब्ध बालको और प्रतीक्षारत दंपति की विवरणी की उपलब्धता की नई व्यवस्था के संबंध में जानकारी उपलब्ध कराई गई। नई व्यवस्था के अंदर भावी दत्तक माता-पिता अब सामान्य तौर पर पांच बार प्राथमिकता विकल्पों को तथा लिंग, उम्र, एकल/भाई बहन तथा राज्य/जोन को तीन बार संशोधित कर सकेंगे।

दत्तक ग्रहण के क्या नियम हैं:- गोद लेने के इच्छुक माता-पिता, भावी दत्तक ग्राही अभिभावक के द्वारा केयरिंगस carings.wcd.gov.in पर आधार कार्ड, वोटर कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट, जन्म प्रमाण पत्रों में से किसी एक पहचान पत्र के साथ निबंधन किया जाना है तथा दत्तक ग्रहण हेतु आवश्यक दस्तावेजों को 30 दिनों के भीतर केयरिंगस पर अपलोड किया जाना है।

गृह अध्ययन रिपोर्ट, प्रतीक्षा सूची, मिलान प्रक्रिया, बच्चों का आरक्षण, स्वीकृति, याचिका और भावी दत्तक माता-पिता के शारीरिक, मानसिक एवं भावनात्मक रूप से दृढ़ता, वित्तीय सक्षमता एवं दत्तक ग्रहण प्रेरणा, गंभीर बीमारियों से अरुगणता, दंपति की दशा में पति-पत्नी दोनों की सहमति, दंपति के कम से कम दो वर्ष स्थिर वैवाहिक संबंध, एकल पुरुष अभिभावक को केवल लड़का गोद दिया जा सकता है।

जबकि एकल महिला अभिभावक लड़का एवं लड़की दोनों को गोद ले सकती है। अलग-अलग उम्र वाले दंपति को अलग-अलग उम्र के बच्चे की पात्रता होती है। दो संतान वाले दंपत्ति सामान्य बालक के दत्तक ग्रहण के लिए पात्र नहीं है। वे सिर्फ विशेष आवश्यकता वाले बालकों को ही दत्तक ग्रहण कर सकते हैं। देश में किसी अन्य माध्यम से बच्चा गोद लेना और देना कानूनी अपराध है।

दत्तक ग्रहण एवं निरीक्षण के दौरान जिला वेक्टर जनित रोग पदाधिकारी बक्सर, कोषागार पदाधिकारी बक्सर, सहायक निदेशक सामाजिक सुरक्षा कोषांग बक्सर, सहायक निदेशक जिला बाल संरक्षण इकाई बक्सर, जिला नियोजन पदाधिकारी बक्सर, दत्तक ग्रहण कमेटी के चिकित्सक, समन्वयक एवं अन्य संबंधित पदाधिकारी उपस्थित थे।

न्यूज़ डेस्क

Author at DUMRAON NEWS EXPRESS

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