*बक्सर। डुमरांव प्रखंड अंतर्गत मठिला ग्राम की निवासी माधुरी देवी की जीवन यात्रा ग्रामीण महिला के आर्थिक सशक्तिकरण एवं आत्मनिर्भरता का प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत करती है।माधुरी देवी के परिवार में कुल चार सदस्य हैं। वह स्वयं, उनके पति, एक पुत्र और एक पुत्री। उनके पति खेती-बाड़ी का कार्य करते थे। खेती से होने वाली आमदनी परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं थी।
घरेलू खर्च, बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और अन्य आवश्यकताओं के बीच परिवार को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।माधुरी देवी को पहले से ही सिलाई का हुनर आता था। सिलाई में उनकी रुचि भी थी और वह चाहती थीं कि अपने इस हुनर से परिवार की आमदनी बढ़ाने में योगदान दें। लेकिन उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती थी-सिलाई मशीन खरीदने के लिए पूंजी का अभाव।
उनके पास हुनर था, मेहनत करने का जज्बा था, लेकिन उस हुनर को आय में बदलने के लिए आवश्यक साधन नहीं था।माधुरी देवी पार्वती स्वयं सहायता समूह (SHG) की सक्रिय सदस्य हैं। जीविका से जुड़ने के बाद उनके जीवन में धीरे-धीरे ऐसे बदलाव आने लगे, जिन्होंने उनके हुनर को एक नई पहचान दी और उन्हें आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ाया।कहानी में बदलाव की जरूरत सिर्फ एक अवसर की थी और वह अवसर उन्हें जीविका के माध्यम से मिला।
माधुरी देवी कुछ बहनों की सलाह से जीविका से जुड़ीं। स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने नियमित बचत की आदत अपनाई और प्रत्येक सप्ताह 10 रुपए की बचत करने लगीं।समूह से जुड़ने के साथ उनमें वित्तीय अनुशासन और आत्मविश्वास विकसित हुआ। आगे चलकर मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत उन्हें 10000 रूपये की वित्तीय सहायता प्राप्त हुई।
माधुरी देवी ने इस राशि को खर्च करने के बजाय इसे अपनी क्षमता और हुनर को मजबूत करने में लगाया। उन्होंने 10000 रूपये से सिलाई मशीन खरीदी।सिलाई मशीन मिलने के बाद माधुरी देवी ने अपने पुराने हुनर को व्यवस्थित रूप से आजीविका के रूप में अपनाना शुरू किया। अब वह आसपास के लोगों के कपड़ों की सिलाई करती हैं और अपने काम के माध्यम से नियमित आय अर्जित कर रही हैं।
वर्तमान में वह सिलाई के कार्य से प्रतिदिन लगभग 500 रूपये तक की आय अर्जित कर लेती हैं।माधुरी देवी के लिए सिलाई मशीन खरीदना केवल एक आर्थिक निवेश नहीं था, बल्कि आत्मनिर्भर बनने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था।आज वह अपने हाथों के हुनर से आय अर्जित कर रही हैं। उन्हें यह विश्वास मिला है कि आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद यदि सही अवसर, वित्तीय सहयोग और मेहनत का साथ मिले, तो किसी भी कौशल को आजीविका का साधन बनाया जा सकता है।
उनकी कहानी इस बात का उदाहरण है कि महिला सशक्तिकरण केवल सहायता देने से नहीं, बल्कि महिलाओं की क्षमता को अवसर देने से मजबूत होता है।”हुनर पहले भी था, जरूरत सिर्फ एक अवसर की थी। जीविका के सहयोग से वही हुनर आज माधुरी देवी की आजीविका और आत्मविश्वास की पहचान बन गया है।”