विजयादशमी महोत्सव का बारहवां दिन भावपूर्ण मंचन से गुंजायमान
बक्सर। नगर का वातावरण भक्ति और श्रद्धा से सराबोर है। श्री रामलीला समिति बक्सर के तत्वावधान में चल रहे 22 दिवसीय विजयादशमी महोत्सव के बारहवें दिन गुरुवार को रामलीला मंच पर देर रात तक दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ी रही। श्रद्धालुजन पूरी तन्मयता से लीला का आनंद लेते रहे और मंचित प्रसंगों के दौरान “जय श्रीराम” तथा “जय श्रीकृष्ण” के उद्घोष से पूरा पंडाल गुंजायमान हो उठा।
दशरथ मरण और भरत मिलाप का मार्मिक प्रसंग
गुरुवार की देर रात मंचन की शुरुआत “दशरथ मरण” प्रसंग से हुई। कथा के अनुसार मंत्री सुमंत प्रभु श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण को गंगा तट पर छोड़कर अयोध्या लौटते हैं। व्याकुल सुमंत जब महाराज दशरथ को समस्त वृत्तांत सुनाते हैं तो राम-वियोग से व्यथित महाराज दशरथ का स्वास्थ्य बिगड़ जाता है और वे विलाप करते-करते देह त्याग देते हैं।
यह दृश्य इतना हृदयस्पर्शी था कि दर्शकों की आँखें नम हो गईं। मंच पर कलाकारों की संवाद शैली और अभिनय ने मानो वास्तविक दृश्य को साकार कर दिया।
इसके बाद चित्रकूट में भरत मिलाप का प्रसंग मंचित हुआ। पिता के निधन का समाचार पाकर भरत अयोध्या लौटते हैं, अंतिम संस्कार संपन्न कर श्रीराम को अयोध्या लौटने की प्रार्थना करने चित्रकूट पहुंचते हैं। मार्ग में निषादराज से उनकी भेंट होती है और अंततः वे प्रभु श्रीराम से मिलते हैं। भरत जी बार-बार अयोध्या लौटने की विनती करते हैं, परंतु राम पिता के वचनों को निभाने की बात कहकर इंकार कर देते हैं। वे भरत को अपनी चरण पादुका सौंप देते हैं। भरत पादुकाओं को राजसिंहासन पर स्थापित कर अयोध्या लौट जाते हैं। इस प्रसंग ने उपस्थित दर्शकों को गहन भक्ति और भावनाओं से सराबोर कर दिया।
कृष्णलीला में सुदामा चरित्र भाग-2 का मंचन
इसी क्रम में दिन में श्री राधा माधव रासलीला एवं रामलीला मंडल वृंदावन के कलाकारों ने कृष्णलीला के अंतर्गत सुदामा चरित्र भाग-2 का मंचन किया। इसमें दर्शाया गया कि गरीबी से जूझ रहे सुदामा अपनी पत्नी वसुंधरा के आग्रह पर अपने बचपन के मित्र श्रीकृष्ण से मिलने द्वारका जाते हैं। सुदामा द्वारा भेंट में लाए गए मुट्ठीभर चावल को प्रभु श्रीकृष्ण प्रसन्नतापूर्वक ग्रहण करते हैं और उसके बदले सुदामा को अपार संपत्ति प्रदान करते हैं। इस अद्भुत मित्रता और भगवान की कृपा को देख दर्शक “जय श्रीकृष्ण” का जयघोष करने लगे।
भक्तिमय माहौल में डूबे श्रद्धालु
रामलीला और कृष्णलीला दोनों ही मंचनों के दौरान पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। बच्चे, महिलाएँ और बुजुर्ग सभी बड़ी श्रद्धा और रुचि से लीला का आनंद ले रहे थे। मंचन के समय दर्शकों की भीड़ इतनी अधिक थी कि पंडाल के बाहर तक लोग खड़े होकर प्रसंगों का रसपान करते रहे।
समिति के पदाधिकारी और आयोजन
पूरे कार्यक्रम का संचालन वृंदावन से आए मंडल स्वामी सुरेश उपाध्याय “व्यास जी” के सफल निर्देशन में हुआ। आयोजन के दौरान समिति के सचिव बैकुंठनाथ शर्मा, संयुक्त सचिव सह मीडिया प्रभारी हरिशंकर गुप्ता, सुशील मानसिंहका, राजेश चौरसिया, ब्रजमोहन सेठ, पवन चौरसिया, उपेंद्र पांडेय सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।
दर्शकों में उत्साह
राम-भरत मिलन और कृष्ण-सुदामा की मित्रता का मंचन देखकर दर्शक भाव-विभोर हो गए। कई दर्शकों ने कहा कि मंचन इतना जीवंत था कि मानो हम उसी कालखंड में पहुँच गए हों। लोगों ने कलाकारों की सराहना करते हुए इसे अविस्मरणीय अनुभव बताया।