दीप प्रज्वलन के साथ हुआ शुभारंभ, स्थानीय व राष्ट्रीय कलाकारों ने बांधा समां
डुमरांव। कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार सरकार एवं जिला प्रशासन बक्सर के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार, 21 मार्च 2026 को राज +2 उच्च विद्यालय डुमरांव में ‘उस्ताद बिस्मिल्ला खां महोत्सव’ का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई, जिसमें डुमरांव विधायक राहुल कुमार सिंह, जिला पदाधिकारी बक्सर श्रीमती साहिला, उप विकास आयुक्त श्रीमती निहारिका छवि, अपर समाहर्ता श्री अरुण कुमार सिंह एवं अनुमंडल पदाधिकारी डुमरांव ने संयुक्त रूप से भाग लिया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला पदाधिकारी ने महान शहनाई वादक उस्ताद बिस्मिल्ला ख़ाँ के जीवन और योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि बिस्मिल्ला खां का जन्म डुमरांव की पावन भूमि पर हुआ था और उन्होंने शहनाई वादन को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। बनारस घराने की शैली में उन्होंने अपनी कला को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। संगीत के प्रति उनकी साधना और समर्पण ने उन्हें पद्मश्री, पद्म भूषण, पद्म विभूषण जैसे प्रतिष्ठित सम्मान दिलाए, वहीं वर्ष 2001 में उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से भी नवाजा गया।
महोत्सव में स्थानीय कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया। सुमन कुमारी, अमित कुमार, अभिषेक कुमार, ऐश्वर्या कुमारी, शिवपुर्णा पाण्डेय, ओमकार दूबे, ज्योति कुमारी एवं ब्रजेश चौबे ने गायन प्रस्तुत किया, वहीं मनोज मोहित ने नृत्य से कार्यक्रम में रंग भर दिया। शुभम कुमार एवं उनके समूह द्वारा समूह गायन की प्रस्तुति ने माहौल को और भी संगीतमय बना दिया।
मुख्य कार्यक्रम में प्रसिद्ध सूफी एवं बॉलीवुड गायक राकेश राज शानू ने अपनी प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं जयपुर घराने के शबरी ब्रदर्स और उस्ताद बिस्मिल्ला खां घराने के कलाकारों द्वारा शहनाई वादन की प्रस्तुति ने पूरे परिसर को मधुर सुरों से गुंजायमान कर दिया। शहनाई की धुनों ने उपस्थित लोगों को भारतीय शास्त्रीय संगीत की गहराई से रूबरू कराया।
यह महोत्सव न केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम था, बल्कि डुमरांव की ऐतिहासिक और सांगीतिक विरासत को सहेजने का एक महत्वपूर्ण प्रयास भी रहा। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, छात्र-छात्राएं एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। आयोजन ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि डुमरांव की धरती कला और संस्कृति की समृद्ध परंपरा को आज भी जीवित रखे हुए है।

