नावानगर (बक्सर)। प्राथमिक विद्यालय गुंजाडिहरी में “हर बच्चा होगा अब स्कूल का हिस्सा” एवं “निपुण बनेगा बिहार हमारा” विषय पर शिक्षक–अभिभावक संगोष्ठी का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन विद्यालय की प्रधान शिक्षिका के निर्देश में तथा सहायक शिक्षिका मनोरमा कुमारी के सक्रिय सहयोग से किया गया। संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य अभिभावकों को बच्चों की शिक्षा के प्रति जागरूक करना और बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान (Foundational Literacy & Numeracy) के महत्व को समझाना था।
बैठक के दौरान शिक्षकों ने अभिभावकों को बताया कि पढ़ना, लिखना और गणना जैसे आधारभूत कौशल बच्चों के पूरे जीवन की नींव होते हैं। यदि बच्चा प्रारंभिक कक्षा में ही इन कौशलों में निपुण हो जाए, तो आगे की पढ़ाई सरल हो जाती है और बच्चे में आत्मविश्वास, समझ तथा निर्णय क्षमता का विकास होता है। शिक्षकों ने यह भी स्पष्ट किया कि निपुण बिहार अभियान के अंतर्गत सरकार का लक्ष्य है कि प्रत्येक बच्चा कक्षा तीन तक बुनियादी साक्षरता और गणितीय दक्षता प्राप्त कर ले।
संगोष्ठी में यह भी बताया गया कि बच्चों की सीखने की प्रक्रिया में केवल विद्यालय ही नहीं, बल्कि अभिभावकों की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। यदि माता-पिता घर पर बच्चों को पढ़ाई के लिए समय दें, उनकी रुचि बढ़ाएं, नियमित रूप से विद्यालय भेजें और होमवर्क पर ध्यान दें, तो बच्चों का शैक्षणिक स्तर और बेहतर हो सकता है। अभिभावकों को यह भी समझाया गया कि बच्चों की नियमित उपस्थिति, स्वच्छता, समय पर भोजन और सुरक्षित वातावरण पढ़ाई में उनकी प्रगति को सीधे प्रभावित करता है।
इस अवसर पर शिक्षक–अभिभावकों के बीच बच्चों की उपस्थिति, शैक्षणिक उपलब्धि, डिजिटल लर्निंग, स्वच्छता, अनुशासन और विद्यालय में उपलब्ध सुविधाओं जैसे विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। शिक्षकों ने अभिभावकों को यह भी बताया कि आज के डिजिटल युग में बच्चों का संतुलित रूप से तकनीक से जुड़ना जरूरी है, ताकि वे मोबाइल और इंटरनेट का सही उपयोग सीख सकें, न कि उसका दुरुपयोग करें।
विद्यालय परिवार ने सभी अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों को प्रतिदिन समय पर विद्यालय भेजें, घर पर पढ़ाई के लिए अनुकूल माहौल बनाएं और शिक्षकों के साथ निरंतर संपर्क में रहें। इससे बच्चों के सर्वांगीण विकास में सहयोग मिलेगा और “हर बच्चा निपुण बने” का सपना साकार हो सकेगा।
कार्यक्रम में अभिभावकों की सक्रिय सहभागिता सराहनीय रही। उन्होंने भी अपने विचार साझा किए और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए विद्यालय के साथ मिलकर कार्य करने का संकल्प लिया। संगोष्ठी सौहार्दपूर्ण एवं प्रेरणादायक वातावरण में संपन्न हुई।