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सीतामढ़ी : कालाजार व डेंगू पर किए गए प्रयासों की डॉ बीके सिंह ने की सराहना

– क्षेत्रीय मलेरिया पदाधिकारी डॉ बीके सिंह ने किया मुआयना – नगर पंचायतों के 90 फीसदी ईलाकों में हो चुकी...

– क्षेत्रीय मलेरिया पदाधिकारी डॉ बीके सिंह ने किया मुआयना

– नगर पंचायतों के 90 फीसदी ईलाकों में हो चुकी फॉगिंग

सीतामढ़ी। कालाजार नियंत्रण के लिए सीतामढ़ी पूरे राज्य में प्रशंसित है। कालाजार की वर्तमान स्थिति को बनाए रखने के लिए पिछले 30 कार्य दिवसों से जिले के 79 राजस्व गांवों में सिंथेटिक पॉयरेथायराइड का छिड़काव हो रहा है। इस छिड़काव का मुआयना करने तिरहुत के क्षेत्रीय मलेरिया पदाधिकारी डॉ बीके सिंह रून्नीसैदपुर के आनंदपुर बीसुनी गांव पहुंचे। वहां उन्होंने सिंथेटिक पॉयरेथॉयराइड के हो रहे छिड़काव दल से छिड़काव का जायजा लिया।

छिड़काव के कार्यों से वह काफी खुश दिखे। छिड़काव दल से उन्होंने रजिस्टर मेंटेनेंस, दवा की मात्रा, छिड़काव का स्थल और दूरी संबंधी अनेक प्रश्न पूछे, जिसका उत्तर छिड़काव दल ने बहुत ही अच्छे से दिया। मालूम हो कि 60 दिन चलने वाले इस आइआरएस चक्र के एक महीने में 52 प्रतिशत राजस्व गांवों में लक्ष्य की पूर्ति हो चुकी है। अभी जिले में कुल 8 कालाजार के मरीज हैं। छिड़काव के इस कार्य में कुल 38 दल तैनात हैं।

डेंगू की वर्तमान स्थिति से भी हुए अवगत

जिला भीबीडीसी पदाधिकारी डॉ रविन्द्र कुमार ने बताया कि तिरहुत क्षेत्रीय मलेरिया पदाधिकारी डॉ बीके सिंह ने रून्नी सैदपुर में डेंगू वार्ड का जायजा भी लिया वहां उन्होंने मुख्य  रूप से एनएस 1 किट, मच्छरदानी सहित बेड, पारासीटामोल और साफ सफाई का हाल लिया। डेंगू के लिए की गयी व्यवस्था पर उन्होंने संतोष जताया। डॉ रविन्द्र कुमार ने बताया कि अभी तक जिले में कुल 11 डेंगू के मरीज मिल चुके हैं। डेंगू के उपचार व जांच के लिए जिले में बेहतर संसाधन उपलब्ध है। सदर अस्पताल में एलीसा टेस्ट भी उपलब्ध है। वहीं हरेक पीएचसी पर एनएस 1 किट उपलब्ध है। एनएस 1 किट में पॉजिटिव वालों को संदिग्ध मानते हुए उसे एलीसा टेस्ट के लिए सदर अस्पताल भेजा जाता है।

डेंगू के लक्षण

तेज बुखार

सिरदर्द

मांसपेशियों, हड्डियों और जोड़ों में दर्द

उल्टी

जी मिचलाना

आंखों में दर्द होना

त्वचा पर लाल चकत्ते होना

ग्लैंड्स में सूजन होना

डेंगू बुखार से बचाव के उपाय

डेंगू से खुद को सुरक्षित रखने का प्राथमिक तरीका मच्छर के काटने से दूरी बनाए रखना है। डेंगू से बचाव के कुछ उपाय निम्नलिखित हैंः

मच्छरों के रिप्रोडक्शन को कम करें

डेंगू फैलाने वाले मच्छर रुके हुए पानी में पनपते हैं। इससे बचने के लिए टायर, प्लास्टिक कवर, फूल के बर्तन, पालतू जानवरों के पानी के कटोरे आदि जैसी चीज़ों को ढकें। इन मच्छरों के प्रजनन के लिए उपलब्ध आवास (स्थिर पानी) को कम करने या खाली करने से से डेंगू बुखार की रोकथाम में सहायता मिल सकती है।

मच्छर निरोधक से बचाव करें

विशेष रूप से घनी आबादी और भीड़ वाले स्थानों में मच्छर निरोधकों का उपयोग करने से मच्छरों को आपसे दूर रखने में मदद मिल सकती है। कुछ क्षेत्रों की यात्रा करते समय और यहां तक ​​कि जब आप घर पर हों तो भी अपनी त्वचा पर मच्छर प्रतिरोधी क्रीम लगाएं।

आप डेंगू बुखार की रोकथाम और काटने से सुरक्षा के लिए विश्वसनीय त्वचा देखभाल ब्रांडों से बच्चों या नवजात शिशुओं के लिए मच्छर पैच, मच्छर बैंड और मच्छर वाइप्स खरीद सकते हैं।

साफ़ और सुरक्षित कपड़े पहनें

मच्छरों के काटने से बचने के लिए लंबी बाजू के कपड़े और मोटे पैंट, मोज़े और सुरक्षित जूते पहनें।

मच्छरदानी का प्रयोग करें

डेंगू बुखार की रोकथाम के आपके प्रयास में मच्छरदानी के नीचे सोने से आपको मच्छरों के काटने से सुरक्षा मिल सकती है।

कहीं भी पानी जमा न होने दें

रुके हुए पानी में मच्छर पनपते हैं। फूलों के बर्तनों को खाली करें, अपने पालतू जानवर के पानी के कटोरे को साफ करें और बदलें, अपने घर के अंदर किसी भी पानी के पौधे को रखने से बचें, सुनिश्चित करें कि पानी की पाइप लाइन अच्छी तरह से काम कर रहे हैं और किसी भी पानी वाले बर्तन या ड्रम को ढक कर रखें।

अभय कुमार

Author at DUMRAON NEWS EXPRESS

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