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रामलीला मंच पर दूसरे दिन “नारद मोह लीला एवं श्री कृष्ण जन्म का हुआ मंचन”

बक्सर : श्री रामलीला समिति बक्सर के तत्वावधान में नगर के रामलीला मंच पर चल रहे 21 दिवसीय विजयादशमी महोत्सव...

बक्सर : श्री रामलीला समिति बक्सर के तत्वावधान में नगर के रामलीला मंच पर चल रहे 21 दिवसीय विजयादशमी महोत्सव 2023 के दौरान आज दूसरे दिन रविवार को वृंदावन श्रीधाम से पधारे श्री नंद नंदन रासलीला एवं रामलीला संस्थान के स्वामी श्री करतार व्रजवासी जी के सफल निर्देशन में देर रात्रि मंचित रामलीला प्रसंग के दौरान “नारद मोह लीला” का मंचन किया गया.

जिसमें दिखाया गया कि नारद जी हिमालय में जाकर समाधिरत रहते हैं. यह देखकर देवराज इंद्र काफी चिंतित होते है. उनकी तपस्या से उनका सिंहासन हिल उठता है. वह नारद जी के ध्यान को भंग करने के लिए कामदेव को उनके समक्ष भेजते हैं.

कामदेव समस्त कलाओं का प्रयोग करने के पश्चात भी नारद जी का ध्यान भंग नहीं कर पाते हैं, और अंत में उनके चरणों में शरणागत होकर याचना करने लगते हैं. नारद जी उन्हें क्षमा कर देते हैं.

परंतु कामदेव को पराजित करने का उनको अभिमान हो जाता है. काम और क्रोध दोनों को जीत लेने के अभिमान से वशीभूत हो जाने पर वह भगवान शंकर जी से यह बात बताते हैं, भोलेनाथ उनसे इस बात को गुप्त रखने का परामर्श देते हैं परन्तु नारद जी अपने पिता ब्रह्मा जी को बताते हुए भगवान विष्णु जी के पास भी पहुंचकर काम और क्रोध को जीतने की बात बताते हैं.

इनके अभिमान को देखकर विष्णु भगवान एक माया रूपी नगर की रचना करते हैं. उस माया रूपी नगरी में विश्व मोहिनी नामक सुंदर बाला को देखकर नारद जी मोहित हो जाते हैं…और उससे विवाह करने के लिए भगवान विष्णु के पास जाकर अपना सुंदर रूप मांगते हैं.

इधर नारायण उनके अभिमान को खत्म करने के लिए सारा शरीर सुंदर लेकिन उनका चेहरा बंदर का प्रदान करते हैं. यह देख सभी लोग नारद जी का उपहास करते है. जब नारद जी अपने चेहरे को देखते हैं तो क्रोध में आकर नारायण को पृथ्वी पर अवतरित होने का श्राप देते हैं. उक्त लीला का दर्शन कर श्रद्धालु भाव विभोर हो जाते है.

दूसरी तरफ दिन में कृष्ण लीला के दौरान रविवार को ‘श्री कृष्ण जन्म लीला’ प्रसंग का मंचन किया गया. जिसमें दिखाया गया कि मथुरा के राजा कंस की बहन देवकी का विवाह वासुदेव से होता है. जब कंस अपनी बहन देवकी को विदा करने जा रहा था तो मार्ग में आकाशवाणी होती है कि तू जिस देवकी को विदा करने जा रहा है उसका आठवां पुत्र तेरा काल होगा.

यह सुनकर कंस अपनी बहन को मारने को उद्धत होता है, परंतु अग्रसेन के विरोध के पश्चात वसुदेव- देवकी को कारागार में डालकर स्वयं मथुरा का राजा घोषित कर देता है. जब देवकी का प्रथम पुत्र हुआ तो कंस ने उसे वापस कर दिया. तब नारद जी ने समझाया आठवां संतान ऊपर या नीचे की गिनती से कोई भी हो सकता है.

तब कंश देवकी के छ: संतानों को समाप्त कर दिया सातवा पुत्र गर्भ में ही नष्ट हो गया और आठवें पुत्र के रूप में श्री कृष्ण का जन्म होता है. वासुदेव उन्हें रात्रि में ही यमुना पार कर गोकुल में नंद- यशोदा के यहां पहुंचा देते हैं. यह दृश्य देख दर्शक भाव विभोर हो जाते हैं.

न्यूज़ डेस्क

Author at DUMRAON NEWS EXPRESS

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