मोतीहारी – बढ़ती जनसंख्या पर रोकथाम के लिए जरूरी है परिवार नियोजन कराना : सीएस

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मोतिहारी। जिले में 18 नवंबर से 4 दिसंबर तक “परिवार नियोजन सेवा पखवाड़ा” के अंतर्गत पुरुष नसबंदी पखवाड़ा का आयोजन किया गया । सिविल सर्जन डॉ अंजनी कुमार ने बताया कि स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा स्वास्थ्य केंद्रों पर आने वाले योग्य दंपति को परिवार नियोजन के संबंध में परामर्श दिया गया। ख़ास कर पुरुषों को बढ़ती जनसंख्या पर रोक के लिए नसबंदी हेतु जागरूक करते हुए पुरूष नसबंदी किया गया।

बच्चे अपनी मर्जी से, अनचाहे नहीं

एफआर एच एस के जिला प्रतिनिधि रूपेश कुमार ने बताया कि बच्चे अपनी मर्जी  से अनचाहे नहीं, स्लोगन के साथ 4 दिसम्बर तक आयोजित पुरूष नसबंदी पखवाडा में एफआर एचएस इंडिया के सहयोग से डॉ शंभु शरण प्रसाद के द्वारा पकड़ीदयाल मे 12, सुगौली मे 5 यानी कुल 17 पुरुषों ने नसबंदी कराया गया है। जिला प्रबंधक रूपेश कुमार ने बताया कि  घर घर जाकर आशा कार्यकर्ताओं के साथ स्वास्थ्य कर्मियों ने लोगों को पुरूष नसबंदी के बारे में  जागरूक किया।  इसमे प्रितेश रंजन, मुकेश कुमार का भी योगदान रहा।

अब बंध्याकरण है एक सरल प्रक्रिया

एफआरएचएस के जिला प्रतिनिधि रूपेश कुमार ने कहा कि बच्चे अपने मर्जी से अनचाहे नहीं  संदेश के साथ बंध्याकरण में एफआरएचएस की टीम सहयोग कर रही है। उन्होंने बताया कि अनचाहे गर्भ धारण से बचाव को बन्ध्याकरण जरूरी है। यह एक मामूली तथा साधारण सी शल्य क्रिया है, किंतु पुरुषों को शल्यक्रिया के पश्चात कम से कम 48 घंटे आराम करना होता है तथा एक सप्ताह तक उन्हें कोई भारी सामान नहीं उठाना चाहिए। एक सप्ताह आराम के बाद ही कोई कार्य आरंभ करना चाहिए। यदि शल्य क्रिया के बाद तेज बुखार, अधिकाधिक या लगातार रक्त स्राव, सूजन या दर्द होता हो, तो तत्काल डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। पुरुष का बन्ध्याकरण करना सुरक्षित और आसान है। महिला बंध्याकरण में लाभार्थियों को 2000/- एवं पुरुष नसबंदी में  3000/- दिया जाता है।

महिला नसबंदी से भी सरल प्रक्रिया है पुरूष नसबंदी

डीसीएम नन्दन झा ने बताया कि महिला बंध्याकरण से पुरुष नसबंदी की प्रक्रिया सरल है । पुरुष नसबंदी को लेकर समाज में कई प्रकार का भ्रम फैला हुआ है। इस भ्रम को तोड़ना होगा। छोटा परिवार सुखी परिवार की अवधारणा को साकार करने के लिए पुरुष को आगे बढ़कर जिम्मेदारी उठाने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि पुरुष नसबंदी महिला बंध्याकरण की तुलना में आसान है और इससे पुरुषों की पौरुषता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।

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