हाथीपांव का लक्षण दिखे तो तत्काल कराएं जांच, चिकित्सा परामर्श जरूरी

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बक्सर, 08 फरवरी | फाइलेरिया उन्मूलन के लिए राज्य स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है। जिसके तहत जिले के सभी प्रखंडों में भी फाइलेरिया क्लिनिक का शुभारंभ किया जा रहा है। जहां पर मरीजों को एमएमडीपी (रुग्णता प्रबंधन व दिव्यांगता प्रबंधन) की जानकारी दी जा सके। इस क्रम में जिले के केसठ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भी फाइलेरिया क्लिनिक का उद्घाटन बुधवार को किया गया। साथ ही, शिविर का आयोजन कर फाइलेरिया मरीजों के बीच एमएमडीपी किट का वितरण किया गया।

इस दौरान प्रदत्त किट का सही इस्तेमाल समेत फाइलेरिया से बचाव समेत इसके कारण, लक्षण एवं उपचार की विस्तृत जानकारी दी गई। साथ ही लक्षण दिखते ही तुरंत जांच कराने और जांच के पश्चात चिकित्सा परामर्श का पालन करने समेत अन्य आवश्यक जानकारी दी गई। ताकि संबंधित मरीज शुरुआती दौर में ही जांच करा सकें और ससमय इलाज शुरू हो सके। मौके पर केसठ प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. विनय कुमार सिंह, वेक्टर जनित रोग नियंत्रण सलाहकार राजीव कुमार, बीएचएम सुशील कुमार, वीबीडीएस उपेंद्र पांडेय, अकाउंट मैनेजर रजनीकांत राय समेत अन्य सहयोगी संस्थानों के प्रतिनिधि तथा फ्रंट लाइन वर्कर्स और फाइलेरिया मरीज उपस्थित रहे ।

लक्षण समेत अन्य जरूरी जानकारी दी गई

प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने बताया कि इस शिविर में सभी मरीजों के बीच एमएमडीपी किट के साथ-साथ फाइलेरिया से बचाव से संबंधित आवश्यक और जरूरी जानकारी भी दी गई। जिसमें संक्रमित मरीजों को किन-किन बातों का ख्याल रखते हुए इलाज कराना है। फाइलेरिया से बचाव के लिए क्या-क्या सावधानी बरतनी है। इसके कारण और लक्षण समेत अन्य जरूरी जानकारी दी गई।

उन्हें यह भी बताया गया कि फाइलेरिया एक गंभीर बीमारी है, जो क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होता है। इसका कोई पर्याप्त इलाज संभव नहीं है। लेकिन, इसे शुरुआत में ही पहचान करते हुए रोका जा सकता है। इसके लिए संक्रमित व्यक्ति को फाइलेरिया ग्रसित अंगों को पूरी तरह स्वच्छ पानी से साफ करना चाहिए। साथ ही सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जा रही डीईसी व अल्बेंडाजोल की दवा का नियमित सेवन करना चाहिए।

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फाइलेरिया का केवल प्रबंधन ही हो सकता है

वेक्टर जनित रोग नियंत्रण सलाहकार राजीव कुमार ने बताया, उचित देखभाल न करने से फाइलेरिया रोगी दिव्यांग हो सकता है। व्यक्ति का जीवन पूरी तरह से प्रभावित हो सकता है। यह बीमारी ठीक तो नहीं हो सकती , केवल प्रबंधन ही हो सकता है। इसलिए साल में एक बार आशा कार्यकर्ता जब फाइलेरिया से बचाव की दवा खिलाने घर पर आयें तो उनके सामने ही इस दवा का जरूर सेवन करें।

उन्होंने बताया कि फाइलेरिया मुख्यतः मनुष्य के शरीर के चार अंगों को प्रभावित करता है। जिसमें पैर, हाथ, हाइड्रोसील एवं महिलाओं का स्तन शामिल हैं । हाइड्रोसील के अलावा फाइलेरिया संक्रमित अन्य अंगों को ऑपरेशन द्वारा ठीक नहीं किया जा सकता है। संक्रमित व्यक्ति को सामान्य उपचार के लिए किट उपलब्ध कराई जाती है, जबकि हाइड्रोसील फाइलेरिया संक्रमित व्यक्ति को मुफ्त ऑपरेशन की सुविधा मुहैया कराई जाती है।

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