डॉ. ओम प्रकाश केसरी पवननंदन रचित लघुकथा संग्रह “आंसू छलक पडे” समीक्षा बैठक सह रविदास जयंती संपन्न

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बक्सर : भारत वर्ष के महान संत रविदास जी की ६४६वीं जयंती की पूर्व संध्या के पावन‌पर्व पर जनहित परिवार साहित्य मंडल, बक्सर, जिला के बैनर तले, हिन्दी एवं भोजपुरी भाषाके सशक्त हस्ताक्षर, जाने_माने साहित्यकार, एवं मंडल के जिलाध्यक्ष डॉ ०ओमप्रकाश केसरी पवननंदन, की सध: प्रकाशित पुस्तक ” आंसू छलक पडे ” हिन्दी लघुकथा, पुस्तक पर एक विशेष समीक्षात्मक संगोष्ठी, मंडल के संरक्षक, वरीय अधिवक्ता, एवं लेखक रामेश्वर प्रसाद वर्मा, जी की अध्यक्षता एवं संचालन में पार्वतीनिवास परिसर में सोल्लस वातावरण में सम्पन्न हुआ।

समारोह का उद्घाटन संत रविदास जी के तस्वीर के समक्ष दीप प्रज्जवलित करके एवं माल्यार्पण करके उद्घाटन कर्ता द्वारा किया गया। उद्घाटन कर्ताओं में मंडल के सचिव अतुल मोहनप्रसाद जी ने कह। आंसू छलक पडे, की लघुकथा की अहमियत बहुत ही वाजिब,समाज का मार्ग दर्शन में सक्षम है। शशि भूषण मिश्र, ने बताया कि लघुकथा के मानक के अनुसार इनकी लघुकथा मानवीय संबंधों को उजागर करती है, मसलन आंसू छलक पडे, तोहफा आदि।कन्हैया पाठक ने भी डॉ पवन नंदन, की कहानियों को सामाजिक रुप से ठीक बताया।

विजय कुमार शर्मा ने बहुत ही उम्दा बताये, राजा रमण पांडे, ( मिठास जी) ने कहा कि इनकी लघुकथा समस्त मानवता की कहानी है, हमें बहुत कुछ सीखने को मिला, सूबेदार पांडेय, अधिवक्ता, ने कहा लेखक या रचनाकार अपनी‌ कृति के माध्यम से अमर हो जाता है, पवन नंदन, वास्तव में अपनी कृति से अमर रहेंगे,। मोबाइल से डॉ महेन्द्र प्रसाद जी संदेश दिया कि पवन नंदन, जी लघुकथा जैसे दुरूह विधा को बड़े ही सहजता इस पुस्तक में दर्शकों के समक्ष पेश किये हैं।

पूर्व नप अध्यक्ष श्रीमती मीना सिंह ने भी मोबाइल के माध्यम से संदेश भेजा कि भाई डा. पवन नंदन, की लघुकथा दिल को टच करती है सभी कहानियां, लेकिन मुआवजा बहुत अधिक, सूझ_बूझ एवं दान लघुकथा के क्षेत्र माध्यम से दधीचि देहदान समिति के थीम यानि नेत्रदान एवं देहदान को बड़े ही खुबसूरती से पेश कियें है।

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लक्ष्मण प्रसाद जायसवाल ने भी इनकी लघुकथा को सराहा है। उसको अपना पात्र बनाकर कथा अथवा कविता के माध्यम से याअन्य साहित्यक विधाके माध्यम से लि खने का कार्य। करता हूँ। इस सबके वाबजूद आप सभी लोगो का स्नेह एवं आशीर्वाद फलीभूत होता है,समापन के डॉ ० ने मुंह मियां मिठ्ठू लघुकथा एवं एक मुक्तक सुनाई। तत्पचात समीक्षात्मक संगोष्ठी का समापन हुआ।

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