कालाजार के मरीज मिलने पर उन्हें जांच के लिए पीएचसी भेजें ग्रामीण चिकित्सक : डॉ. उमेश

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आरा, 13 दिसंबर | जिले में कालाजार उन्मूलन को लेकर विभिन्न कार्यक्रम चलाए जाते हैं। जिसमें सर्वप्रथम प्रभावित गांवों को चिह्नित करते हुए वहां दवाओं का छिड़काव किया जाता है। साथ ही, स्वास्थ्य विभाग की ओर से जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं। ताकि, लोगों को कालाजार के संबंध में जानकारी हो और वो इसके बचाव के लिए जागरूक हो सकें । वहीं, अब प्रखंड स्तर पर ग्रामीण स्तर के चिकित्सकों का उन्मुखीकरण किया जा रहा है। ताकि, ग्रामीण चिकित्सकों को कालाजार से संबंधित जानकारी हो और वो कालाजार मरीज को चिह्नित करते हुए सरकारी अस्पताल पहुंचाने का काम करें। इस क्रम में बीते दिन कोईलवर प्रखंड में स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सकों और कालाजार उन्मूलन कार्यक्रम के अधिकारियों ने ग्रामीण चिकित्सकों के साथ बैठक की । जिसमें एमओआईसी डॉ. उमेश कुमार व वीबीडीएस राजन कुमार ने उन्हें कालाजार की पहचान, इलाज, बचाव और प्रोत्साहन राशि के संबंध में विस्तार से बताया । बैठक में बीसीएम बबन देव, केयर इंडिया बीसी रत्नेश कुमार मिश्रा के अलावा ग्रामीण चिकित्सकों में गणेश प्रसाद, नरेश प्रसाद, विनोद कुमार, रवि रंजन व ओमप्रकाश शामिल रहे ।

बालू मक्खी काटने से फैलता है कालाजार

प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. उमेश कुमार ने बताया कि कालाजार के इलाज में सबसे जरूरी है, बीमारी के प्रारंभिक लक्षणों की पहचान। जिसके बाद उसकी जांच और इलाज की प्रक्रिया शुरू की जाती है। ऐसे में सबसे जरूरी बात है कालाजार के कारणों का पता होना। उन्होंने बताया कि कालाजार लिशमेनिया डोनी नामक रोगाणु के कारण होता है। जो बालू मक्खी काटने से फैलता है। साथ ही यह रोग एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भी प्रवेश कर जाता है। बालू मक्खी जमीन से 6 फुट की ऊंचाई तक ही फुदक सकती है। यह मक्खी नमी व अंधेरे वाले स्थान पर ज्यादा फैलती है। जैसे घरों की दीवारों की दरारों, चूहों के बिल तथा ऐसे मिट्टी के टीले जहां ज्यादा जैविक तत्व और उच्च भूमिगत जल स्तर वाले स्थानों पर रहती है। जिन घरों में बालू मक्खियाँ पाई जाती हैं, उन घरों में कालाजार के संक्रमण का खतरा बढ़ जाता ।

लक्षण दिखने पर जांच कराना आवश्यक

वीबीडीएस राजन कुमार ने बताया कि किसी व्यक्ति को 15 दिन से अधिक बुखार आना, भूख नहीं लगना, रोगी में खून की कमी, रोगी का वजन घटना, रोगी की त्वचा का रंग काला होना आदि कालाजार के लक्षण हो सकते हैं। वहीं इसका सबसे मुख्य लक्षण त्वचा पर धब्बा बनना है। यदि किसी व्यक्ति में उपयुक्त लक्षण पाएं, तो उन्हें तत्काल प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर जांच के लिए भेजें । पीएचसी में कालाजार की जांच की सुविधा नि:शुल्क उपलब्ध है। संक्रमित मरीज मिलने पर उन्हें सदर अस्पताल रेफर किया जाता है। सदर अस्पताल में समुचित इलाज की सुविधा उपलब्ध है। वहां मरीजों का एक ही दिन में इलाज कर दिया जाता है।

मरीजों के अलावा आशा और ग्रामीण चिकित्सकों को राशि देने का प्रावधान

वीबीडीएस राजन कुमार ने बताया, कालाजार से पीड़ित मरीज को 7100 रुपये श्रम क्षतिपूर्ति राशि दी जाती है। वहीं, प्रशिक्षित आशा के द्वारा मरीजों को चिह्नित करने, पीएचसी तक लाने तथा मरीज का ख्याल रखने पर प्रति मरीज 600 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है। यह राशि भारत सरकार एवं राज्य सरकार की तरफ से दी जाती है। इसमें मरीजों के लिए 6600 रुपये और आशा के लिए 100 रुपये की राशि मुख्यमंत्री कालाजार राहत अभियान के अंतर्गत दी जाती है। वहीं प्रति मरीज एवं आशा को 500 रुपये भारत सरकार की तरफ से दिया जाता है। साथ ही, ग्रामीण चिकित्सकों द्वारा पीएचसी भेजे गए मरीजों में यदि कालाजार बुखार की रिपोर्ट पॉजिटिव आता है, तो उन्हें भी 500 रुपए प्रोत्साहन राशि दी जाती है।

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