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पटना : सरकार द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने की ओर कदम- संजय कुमार सिंह  

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– क्वालिटी अश्योरेंस (गुणवत्ता यकीनन इकाई ), राज्य स्वास्थ्य समिति , बिहार के तत्वावधान में  द्वितीय क्वालिटी कॉन्क्लेव का हुआ आयोजन 
– सभी जिलों के स्वास्थ्य अधिकारीयों एवं कर्मियों ने की शिरकत 

पटना | राज्य स्वास्थ्य समिति बिहार के गुणवत्ता यकीन कोषांग द्वारा द्वितीय क्वालिटी कॉन्क्लेव का आयोजन पटना स्थित उर्जा ऑडिटोरियम में किया गया। इस वार्षिक आयोजन की शुरुआत स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करने वाले स्वास्थ्य संस्थानों के प्रदर्शन की सराहना करने तथा उन्हें पुरस्कृत करने के उद्देश्य से की गयी। कार्यक्रम का उद्घाटन कार्यपालक निदेशक, राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार श्री संजय कुमार सिंह एवं डॉ. सरिता, राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी मातृ स्वास्थ्य एवं क्वालिटी अश्योरेंस ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। इस वर्ष की थीम इनोवेशन अर्थात  “नवाचार” रखी गयी है।

कार्यक्रम में राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक के साथ सभी राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी, उपनिदेशक, सहायक निदेशक, सलाहकार एवं कर्मी, जिलों से सभी अधीक्षक एवं उपाधीक्षक, सभी क्षेत्रीय कार्यक्रम प्रबंधक, सभी जिला सलाहकार, क्वालिटी अश्योरेंस,सभी जिला शहरी स्वास्थ्य सलाहकार, सभी जिला अस्पताल प्रबंधक, शामिल रहे। मुख्य अतिथि के रूप में डॉ, भावना गुलाटी एवं डॉ. अभिजित ई कुट्टी ने अपनी उपस्थिति दर्ज करायी।   

कार्यपालक निदेशक, राज्य स्वास्थ्य समिति, संजय कुमार सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार के लिए विभाग लगातार प्रयासरत है और इस कड़ी में संस्थानों की गुणवत्ता में सुधार करना इसका प्रमुख अंग है। स्वास्थ्य विभाग निरंतर प्रयास कर रही है कि अस्पतालों, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों एवं अन्य चिकित्सीय संस्थानों में ढांचागत सुधार के साथ सभी मानकों पर नवीनीकरण हो सके और जनमानस को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सीय सुविधा के लिए राज्य से बाहर का रुख नहीं करना पड़े। क्वालिटी कॉन्क्लेव उसी प्रतिबद्धता को दोहराने और पूरे राज्य को उत्प्रेरित करने का प्रयास है।

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एनक्वास प्रमाणीकरण के लिए कम से कम 6 से 9 महीने की तैयारी जरुरी

डॉ. अम्जिथ ई कुट्टी जो भारतीय सेना में एक सर्जन के रूप में कार्यरत हैं उन्होंने एनक्वास प्रमाणीकरण हासिल करने में केरल राज्य के मॉडल की चर्चा की। उन्होंने सिलसिलेवार तरीके से प्रमाणीकरण हासिल करने में राज्य द्वारा अपनाये गए विभिन्न चरणों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एनकुआस प्रमाणीकरण हासिल करने के लिए कम से कम 6 से 9 महीने की तैयारी जरुरी होती है। इसके लिए जिला से राज्य स्तर तक नियमित समीक्षा कर चीजों पर नजर रखना जरुरी होता है।  

सभी स्वास्थ्य संस्थानों को मिशन मोड में काम करने की जरुरत

डॉ. सरिता, राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी, मातृ स्वास्थ्य एवं क्वालिटी अश्योरेंस ने कहा कि सभी स्वास्थ्य संस्थानों को मिशन मोड में काम करने की जरुरत है। वहीं, डॉ. भावना गुलाटी, एसोसिएट प्रोफेसर एडमिनिस्ट्रेटिव स्टाफ कॉलेज, हैदराबाद ने कहा कि राज्य एवं जिला स्तर पर सभी स्वास्थ्य संस्थानों की गुणवत्ता मानकों में सुधार पर नजर रखी जानी चाहिए एवं समय समय पर उनकी समीक्षा करनी चाहिए।

वित्तीय वर्ष 2021-22 के कायाकल्प, लक्ष्य एवं एनक्वास श्रेणियों में स्वास्थ्य संस्थानों को पुरस्कृत किया गया। कायाकल्प के जिला अस्पताल श्रेणी में भागलपुर, मोतिहारी तथा बेगुसराय को पुरस्कृत किया गया। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र/ रेफ़रल अस्पताल/ अनुमंडलीय अस्पताल श्रेणी में सीएचसी शाहकुंड, रेफ़रल अस्पताल सुल्तानगंज, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र श्रेणी में 16 तथा हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर श्रेणी में 9 संस्थानों को पुरस्कृत किया गया। लक्ष्य प्रमाणित 6 जिला अस्पताल समस्तीपुर, अररिया, भागलपुर, सुपौल, किशनगंज तथा मोतिहारी तथा राज्य एनक्वास प्रमाणित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बछवाड़ा जिला बेगुसराय को पुरस्कृत किया गया।  

राज्य के जिला अस्पतालों के 24/7 क्रियाशीलता एवं गुणवत्तापूर्ण सेवा के लिए आरंभ किये गए मिशन क्वालिटी  ने साकारात्मक परिवर्तन के रूप में उत्प्रेरक का काम किया है। अब सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए राज्य प्रतिबद्ध है।

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