सीतामढ़ी – सामान्य और स्वस्थ दिखने वाले व्यक्ति भी कराएँ फाइलेरिया की जांच : डॉ. रवींद्र यादव

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सीतामढ़ी। जिले में फाइलेरिया उन्मूलन को लेकर 4 नवम्बर से नाइट ब्लड सर्वे किया जाएगा। जिला भीबीडी नियंत्रण पदाधिकारी डॉ रवीन्द्र कुमार यादव ने बताया कि जिले में 4 एवं 5 नवम्बर तथा 7 एवं 8 नवम्बर को नाइट ब्लड सर्वे अभियान चलेगा। इसकी तैयारी पूरी हो गई है। नाइट ब्लड सर्वे के सफल आयोजन के लिए सभी विभाग/स्टेकहोल्डर्स आपसी समन्वय के साथ कार्य करेंगे। उन्होंने कहा कि सर्वजन दवा सेवन कार्यक्रम जो कि नवंबर के अंतिम सप्ताह में शुरू होने की संभावना है, उसके पूर्व रात्रि रक्त पट्ट संग्रह अभियान चलाना अनिवार्य है। 

गांवों में रात्रि के समय स्थानीय ग्रामीणों के लिया जाएगा रक्त का नमूना

डॉ. रवींद्र कुमार यादव ने कहा कि विभागीय स्तर पर चिन्हित किए गए गांवों में रात्रि के समय स्थानीय ग्रामीणों के रक्त का नमूना लिया जाएगा। प्रत्येक प्रखंड में एक रैंडम और एक सेंटीनल साइट पर नाइट ब्लड सर्वे किया जाएगा। वहां नाइट ब्लड सर्वे टीम के सदस्य 20 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के लोगों का सैंपल एकत्र करेंगे। एक साइट पर 300 और दूसरे साइट पर भी 300 यानी कुल 600 लोगों के ब्लड सैंपल लिए जाएंगे। नाइट ब्लड सर्वे में रात 8 बजे से 12 बजे के बीच ही ब्लड सैंपल लिया जाएगा। जिसे जांच के लिए लैब भेजा जाएगा। चूंकि खून में फाइलेरिया के परजीवी रात में ही सक्रिय होते हैं। इसलिए नाइट ब्लड सर्वे से सही रिपोर्ट पता चल पाता है। 

सामान्य और स्वस्थ दिखने वाले व्यक्ति भी जांच कराएं

डॉ. यादव ने फाइलेरिया के होने और उसके स्टेज के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि फाइलेरिया या हाथी पांव के लक्षण सामान्यता शुरू में दिखाई नहीं देते हैं। इसके परजीवी शरीर में प्रवेश करने के बाद इसके लक्षण लगभग पांच से दस सालों बाद दिखाई दे सकते हैं। इसलिए सामान्य और स्वस्थ दिखने वाले व्यक्ति भी इसकी जांच कराएं। फाइलेरिया एक घातक बीमारी है। आमतौर पर फाइलेरिया के लक्षण स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देते, लेकिन बुखार, बदन में खुजली व सूजन की समस्या दिखाई देती है। इसके अलावा पैरों और हाथों में सूजन, हाथी पांव और हाइड्रोसिल अंडकोषों की सूजन, फाइलेरिया के लक्षण हैं। 

प्रखंडों में फाइलेरिया की स्थिति का पता चलेगा

नाइट ब्लड सर्वे की गतिविधियों का आयोजन करने का मुख्य उद्देश्य प्रखंड स्तर पर फाइलेरिया व माइक्रो फाइलेरिया की दर को जानना है। नाइट ब्लड सर्वे से यह पता चलेगा कि कितने लोगों में फाइलेरिया का पैरासाइट मौजूद है। फाइलेरिया का पारासाइट रात में ही सक्रिय होता है। इसलिए नाइट ब्लड सर्वे में ब्लड सैंपल रात में ही लिया जाएगा। नाइट ब्लड सर्वे अभियान के तहत रक्त संग्रह केंद्रों पर ग्रामीणों को बुलाने के लिए आशा कार्यकर्ता और आंगनबाड़ी सेविकाओं सहित अन्य कर्मियों का सहयोग लिया जाएगा। अभियान की सफलता के लिए गांव स्तर पर विभिन्न माध्यमों से जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। 

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