मोतिहारी : आशा कार्यकर्ताओं द्वारा जिले में चलाया जाएगा कालाजार मरीजों की खोज का सघन अभियान

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मोतिहारी। पूरे प्रदेश में कालाजार उन्मूलन को लेकर सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग काफी गंभीर है। जिलों से कालाजार का उन्मूलन हो, इसे सुनिश्चित करने को लेकर अपर निर्देशक सह राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ विनय कुमार शर्मा ने जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी को पत्र जारी कर नया निर्देश दिया है। इस निर्देश के अनुसार, फरवरी माह के प्रथम सप्ताह से कालाजार भीएल, (पिकेडीएल)  के छुपे  मरीजों की आशा कार्यकर्ताओं द्वारा जिले के कालाजार मरीजों के घर के 500 मीटर की परिधि में सघन खोज का जायेगी ।

प्रशिक्षण कार्यक्रम का होगा आयोजन

जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ शरत चन्द्र शर्मा ने बताया  कि जल्द ही आशा कार्यकर्ताओं व स्वास्थ्य कर्मियों का  केयर इंडिया द्वारा प्रशिक्षण कार्यक्रम कराया जाएगा, वहीँ आशा फैसिलिटेटर द्वारा आशा कार्यकर्ताओं की पर्यवेक्षण भी की जाएगी। कालाजार अभियान की  सफलता के लिए  अधिकारियों द्वारा कार्यों का अनुश्रवण किया जाएगा। उन्होंने बताया कि वर्ष 2020, 2021, 2022 में कालाजार से प्रभावित लोगों पर विभाग की विशेष नजर रहेगी, इसके तहत कालाजार मरीजों के घरों के 500 मीटर के दायरे में कालाजार मरीजों की का खोज की जाएगी ।

लोगों को कालाजार से बचाव की दी जाएगी जानकारी

जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ शर्मा ने बताया कि  कालाजार मरीज खोज अभियान के दौरान सामुदायिक स्तर पर लोगों को कालाजार से बचाव के लिए जागरूक किया जाएगा। लोगों को कालाजार के कारण, लक्षण, बचाव एवं इसके उपचार की विस्तृत जानकारी दी जाएगी।

सदर अस्पताल में नि:शुल्क इलाज की सुविधा है उपलब्ध

डॉ शरत चंद्र शर्मा ने बताया कि कालाजार मरीजों की जाँच की सुविधा जिले के सभी पीएचसी में नि:शुल्क उपलब्ध है। जबकि, सदर अस्पताल में समुचित इलाज की सुविधा उपलब्ध है।  इसके कारण संक्रमित मरीज मिलने पर उन्हें संबंधित पीएचसी द्वारा सदर अस्पताल रेफर किया जाता है। मरीजों को सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने पर श्रम क्षतिपूर्ति के रूप में सरकार द्वारा 7100 रुपये की राशि दी जाती है। पीकेडीएल मरीजों को पूर्ण उपचार के बाद सरकार द्वारा 4000 रुपये श्रम क्षतिपूर्ति के रूप में दिये जाने का  प्रावधान है।

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कालाजार के लक्षण

– लगातार रूक-रूक कर या तेजी के साथ दोहरी गति से बुखार आना।

– वजन में लगातार कमी होना।

– दुर्बलता।

– मक्खी के काटे हुए जगह पर घाव होना।

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