मोतीहारी – बढ़ते ठंड में बच्चों को होता है निमोनिया का खतरा : सीएस

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मोतिहारी। कमजोर इम्युनिटी वाले बच्चों को बढ़ते ठंड में निमोनिया का खतरा बना रहता है, इससे बचने के लिए समय पर इसकी पहचान होना बहुत जरूरी है। सीएस डॉ अंजनी कुमार ने बताया कि बच्चों के माता पिता को निमोनिया के प्रति सावधान रहना चाहिए, इसे हल्के में न लेना चाहिए, अन्यथा यह जानलेवा हो सकता है। उन्होंने बताया कि इसके प्रमुख लक्षण है-तेज बुखार, छाती में दर्द, मितली या उल्टी, दस्त, सांस लेने में कठिनाई, थकान और कमजोरी, कफ के साथ खांसी आदि बच्चों में ऐसा लक्षण हो तो तुरंत सरकारी अस्पताल में इसका इलाज चिकित्सक से कराएं, ताकि संक्रमण को बढ़ने से रोका जा सके।

उन्होंने बताया कि निमोनिया बैक्टीरियल इंफेक्शन के कारण होता है। इसके बैक्टीरिया नाक और मुंह के जरिए वायुमार्ग से फेफड़ों में जाते हैं। वहीँ इम्यूनिटी सिस्टम मजबूत हो तो शरीर इन बैक्टीरिया को निष्प्रभावी कर देता है। इम्यूनिटी सिस्टम कमजोर होने पर यह बैक्टीरिया हावी हो जाता है। यह एक ही समय में एक या दोनों फेफड़ों को प्रभावित कर सकता है। कई बार निमोनिया का बैक्टीरिया शरीर के दूसरे अंगों को भी प्रभावित कर सकता है। 

ठंड में बच्चों का निमानिया से करें बचाव

डीआईओ डॉ शरत चन्द्र शर्मा और डीसीएम नन्दन झा ने बताया कि ठंड के मौसम में बच्चों की विशेष देखरेख की आवश्यकता होती है। उन्होंने बताया कि बच्चों को संतुलित भोजन कराएं, साथ ही गर्म वस्त्र पहनाकर रखें। उन्होंने बताया कि  बच्चों को निमोनिया से बचाव को पीसीवी का टीका डेढ़ माह पर पोलियो खुराक, पेंटा, और आईपीवी के साथ दिया जाता है। यही प्रक्रिया साढ़े तीन माह पर अपनाई जाती है। नौ माह के बच्चे को खसरे के टीके के साथ दिया जाता है। इसलिए अपने बच्चे का टीकाकरण अवश्य कराएं।

निमोनिया से बचने के उपाय

हाथों को नियमित रूप से साबुन और पानी से धोएं, कुछ खाने या पीने से पहले भी हाथों को साफ करें। खांसते और छींकते समय मुंह पर रुमाल रखें। गर्म पानी व धूप का सेवन लाभदायक है।

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