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मोतिहारी : अंधेरी रातें भी नहीं रोक सकी नीतू को 

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मोतिहारी। तेतरिया गांव में आजकल आशा नीतू की आवाज अक्सर ही गांव के सन्नाटे को तोड़ती सुनाई पड़ती थी। सुनसान और अंधेरी पगडंडियों से होते हुए वह गांव में एक से दूसरे के दलान पर पहुंचती थी और नाइट ब्लड सर्वे में आने का आग्रह करती थी। नाइट ब्लड सर्वे में सैंपल देने के लिए यह बुलावा उसका पहली बार नहीं है। वह पहले भी लोगों को इसके बारे में विस्तार से बता चुकी है, पर पूर्ण सैंपल इकट्ठा हो इसके लिए वह रात को भी लोगों को उनके घरों से बुलाती थीं। काम के प्रति यह प्रबल समर्पण शायद ही कभी देखने को मिलता है। नीतू के इस काम पर तेतरिया गांव के मुखिया भी काफी खुश दिखाई पड़ते हैं। वहीं नाइट ब्लड सर्वे में कार्यरत स्वास्थ्य कर्मी भी नीतू के इस कार्यक्षमता के लिए उन्हें सराहते हैं।

तीन सौ के लक्ष्य में अकेले नीतू ने एकत्र कराए 120 सैंपल

तुरकौलिया एमओआईसी डॉ रवीन्द्र कुमार कहते हैं कि तेतरिया में तीन दिनों में कुल 300 का लक्ष्य रखा गया था। जिसमें से अकेले नीतू ने कुल 120 लोगों को रक्त के नमूने देने के लिए आग्रह करते हुए जाँच केंद्र ब्रह्मस्थान, मधुआहाँ पर लेकर आई।

एमडीए कार्यक्रम पर भी दी जानकारी

आशा नीतू कहती हैं कि उन्होंने नाइट ब्लड सर्वे का महत्व समझ लिया था। यह सर्वजन कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए बहुत जरूरी था। अपने गांव में भी लोगों को फाइलेरिया से ग्रसित देखती थी। इससे उसकी भी फाइलेरिया के दर को जानने की मंशा जागी और उसने घर और कार्यस्थल दोनों जगह दोहरी जिम्मेदारी निभाते हुए नाइट ब्लड सर्वे में अपने रक्त के नमूने देने के लिए लोगों से मिलना शुरू कर दिया। इसके अलावे वह इसके बाद होने वाले सर्वजन दवा सेवन के बारे में भी लोगों को इसमें खिलाने वाले दवा का महत्व समझा रही थी।

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