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फुलवारीशरीफ सीएससी में हुआ जिले के पहले एमएमडीपी क्लिनिक का शुभारंभ

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पटना | फाइलेरिया के हाथीपांव मरीजों के लिए अच्छी खबर है। अब उनके लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर पर मार्बीडीटी मैनेजमेंट एंड डिसेबिलिटी  प्रीवेंशन (एमएमडीपी) क्लिनिक खोली जा चुकी है। शनिवार को फुलवारीशरीफ प्रखंड स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में जिले का पहले एमएमडीपी क्लिनिक का शुभारंभ किया गया। जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. सुभाष चंद्र प्रसाद एवं प्रखंड चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. आरके चौधरी ने संयुक्त रूप से फीता काटकर क्लिनिक का उद्घाटन किया।

मौके पर डॉ. सुभाष चंद्र प्रसाद ने बताया कि फाइलेरिया एक वेक्टर जनित बीमारी है जो मच्छर के काटने से फैलती है। इस क्रम में पीएचसी स्तर पर मौजूद फाइलेरिया मरीजों के साथ अन्य मरीजों के बीच फाइलेरिया को लेकर लक्षणों की पहचान, इलाज व बचाव की जानकारी दी गई।  साथ ही, मरीजों के बीच फाइलेरिया से संबंधित उपचार विधि और व्यायाम की जानकारी दी गई.  इस दौरान एमओआईसी डॉ. आरके चौधरी, बीएचएम शिप्रा सिंह चौहान, बीसीएम अंबिका कुमार सहित 26 उपचाराधीन फ़ाइलेरिया रोगी मौजूद रहे।

9 मरीजों को बांटी गयी एमएमडीपी किट

एमएमडीपी क्लिनिक के उद्घाटन के साथ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में फ़ाइलेरिया मरीजों की जांच की गयी। कुल 9 मरीजों की जांच की गयी और उन्हें एमएमडीपी किट प्रदान की गयी। जिला वेक्टर बॉर्न डिजीज कंट्रोल ऑफिसर डॉ. सुभाष चंद्र प्रसाद ने मरीजों को किट का इस्तेमाल करके बताया और कहा कि किट में मरीजों को बाल्टी, मग, टब, सूती तौलिया, साबुन व एन्टी फंगल क्रीम दी जाती है। डॉ. सुभाष ने बताया कि मरीजों को किट के प्रयोग की विधि जाननी बेहद जरूरी होती है. जिले का पहला एमएमडीपी क्लिनिक खुलने से जिले में फ़ाइलेरिया मरीजों के उपचार में मदद मिलेगी। 

हर मंगलवार को मरीजों के लिए ख़ास ओपीडी का होगा संचालन

फुलवारीशरीफ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. आरके चौधरी ने कहा कि क्लिनिक में फ़ाइलेरिया मरीजों के उपचार के साथ उनकी काउंसिलिंग भी की जाएगी। क्लिनिक में सभी फ़ाइलेरिया मरीजों को हर संभव सुविधा प्रदान की जाएगी और इसके लिए सभी जरुरी तैयारी कर ली गयी है। हर मंगलवार को फ़ाइलेरिया मरीजों के लिए ख़ास ओपीडी का संचालन किया जायेगा। उन्होंने उपस्थित फ़ाइलेरिया मरीजों से अपने घर एवं आस पास के लोगों को क्लिनिक के बारे में जानकारी देने को कहा और लोगों से विनती करते हुए कहा सभी लोग संदिग्ध फ़ाइलेरिया रोगियों को क्लिनिक में आकर जांच एवं उपचार कराने के लिए प्रेरित करें।    

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संक्रमण के पश्चात बीमारी होने में पांच से 15 वर्ष लग सकते हैं

जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. सुभाष चंद्र प्रसाद ने बताया कि फाइलेरिया मच्छर के काटने से होने वाला एक संक्रामक रोग है। जिससे किसी भी उम्र के व्यक्ति फाइलेरिया से संक्रमित हो सकता है। संक्रमण के पश्चात बीमारी के लक्षण दिखाई देने में 5 से 15 वर्ष लग सकते हैं। उन्होंने बताया, फाइलेरिया मुख्यतः मनुष्य के शरीर के चार अंगों को प्रभावित करता है। जिसमें पैर, हाथ, हाइड्रोसील एवं महिलाओं का स्तन शामिल हैं। हाइड्रोसील के अलावा फाइलेरिया संक्रमित अन्य अंगों को ऑपरेशन द्वारा ठीक नहीं किया जा सकता है। संक्रमित व्यक्ति को समान्य उपचार के लिए किट उपलब्ध कराई जाती है, जबकि हाइड्रोसील फाइलेरिया संक्रमित व्यक्ति को मुफ्त ऑपरेशन की सुविधा मुहैया कराई जाती है।

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