सीतामढ़ी : बच्चों ने भी बताया, खाई है दो गोली.. आप कब खाएगें फाइलेरिया रोधी दवा 

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सीतामढ़ी। पूछने पर बच्चे भी बताते हैं, दो गोली खाई है फाइलेरिया नहीं होने की। वह नादान तो समझ गए.. पर आप कब समझेंगे कि यह फाइलेरिया होने पर खाने वाली दवा नहीं, फाइलेरिया से बचाने वाली दवा है। यह वाक्य भूपभारो गांव में डुमरा के ब्लॉक हेल्थ प्रबंधक कहते दिखे। यहां पर कुछ महिलाओं ने जानकारी के अभाव में दवा खाने से इंकार कर दिया था। फिर समझाने पर उन्होंने दवा खाई।

जिला भीबीडीसी पदाधिकारी डॉ रविन्द्र कुमार यादव कहते हैं लोगों के पास जानकारी का काफी अभाव है, हालांकि इसके लिए प्रचार प्रसार भी किया जा रहा है। सर्वजन दवा सेवन के तहत मिलने वाली दवा किसी रोग का नहीं बल्कि स्वास्थ्य लोगों के लिए दवा की खुराक है, जो फाइलेरिया से मुक्ति दिलाती है। बस इतनी सी ही बात लोगों को समझनी है। दो वर्ष से अधिक उम्र का कोई व्यक्ति इस दवा को खा सकता है बशर्ते कि वह किसी गंभीर रोग से ग्रसित न हो, गर्भवती न हो। 

अधिकारी खुद जा रहे समझाने

डॉ यादव ने कहा कि एमडीए के दौरान मैं और जिला एवं प्रखंड स्तरीय पदाधिकारी प्रतिदिन पर्यवेक्षण कार्य में लगे हुए हैं।  हमारा विशेष ध्यान दूर -दराज के क्षेत्रों में होता है। गुरुवार को सिविल सर्जन डॉ सुरेश चंद्र लाल, डीपीएम असित रंजन ने भी चल रहे सर्वजन दवा सेवन अभियान का मुआयना करने गए।

सिविल सर्जन ने सर्वजन दवा सेवन अभियान तक सभी एमओआईसी, बीएचएम और बीसीएम की हर प्रकार का प्रशिक्षण स्थगित कर दिया है। यह प्रतिदिन अपने पर्यवेक्षण क्षेत्र में जाकर खुद अपने सामने भी लोगों को दवा की खुराक दे रहे हैं। अभी तक कहीं से दवा के प्रतिकूल प्रभाव की जानकारी नहीं आयी है।

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छह दिनों में 41.31 प्रतिशत कवरेज

डॉ रविन्द्र ने बताया कि छह दिनों में कुल लक्ष्य का 41.31 प्रतिशत कवरेज हुआ है। जिस लक्षित आबादी को  फाइलेरिया रोधी दवा खिलानी है उसकी संख्या लगभग 45 लाख दो हजार छह सौ पचहत्तर है। दवा खिलाने के लिए 1579 टीम लगाए गए हैं जिसमें 3158 ड्रग एडमिनिस्ट्रेटर  हैं। वहीं इनकी मॉनिटरिंग के लिए 157 सुपरवाइजर लगाए गए हैं। 

किसी भी एडवर्स रिएक्शन से निपटने के लिए रैपिड रिस्पांस टीम का भी गठन किया गया है। ड्रग एडमिनिस्ट्रेटर के पास माइक्रो प्लान में रैपिड रिस्पांस टीम के अलावे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के बीएचएम, बीसीएम तथा एमओआईसी का भी नंबर उपलब्ध रहेगा, जिसका इस्तेमाल आपातकाल में ड्रग एडमिनिस्ट्रेटर कर सकती है।

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