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मोतिहारी : मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना साबित हो रहा है वरदान

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मोतिहारी। जिले में मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना वरदान साबित हो रही है। इस योजना के अंतर्गत शनिवार को छ: बच्चे को एम्बुलेंस से पटना आईजीआईसी में हृदय रोग की जांच के लिए भेजा गया। सिविल सर्जन डॉ अंजनी कुमार ने बताया कि आबीएसके चिकित्सकों के द्वारा जिले के विभिन्न स्थानों पर बच्चों के स्वास्थ्य की जाँच की जा रही है जिसमें जाँच के दौरान कुछ बच्चों में हृदय रोग से संबंधित लक्षण दिखाई देने पर उन्हें जिले के सदर अस्पताल में स्क्रीनिंग की गई।  इनमें 2 बच्चों को सदर अस्पताल मोतिहारी के पीकू वार्ड  में भर्ती किया गया था, जिन्हें बेहतर इलाज( शल्य क्रिया) हेतु एम्बुलेंस से पटना आई जी आई सी भेजा गया।

राष्ट्रीय बाल स्वास्थय  कार्यक्रम के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ मनीष कुमार, डॉ शशि कुमार, डीसी आरबीएसके ने बताया कि सदर प्रखंड मोतिहारी से दिव्यांश कुमार, 3 वर्ष, विशाल कुमार ,केसरिया 5 माह, चकिया से अंगद कुमार 7 वर्ष, रविरंजन कुमार 13 वर्ष, श्रेया 7 वर्ष, बंजरिया से 4 माह का एक बच्चा शामिल है। उन्होंने बताया कि इन सभी बच्चों के साथ इनके अभिभावक को भी सरकारी खर्चे पर विमान से सत्य साई हॉस्पिटल अहमदाबाद के लिए रवाना किया जाएगा।

मुझे पूरा भरोसा है विशाल जल्द होगा स्वस्थ

केसरिया प्रखंड के पाण्डे टोला निवासी 5 माह के विशाल के पिता विनोद भगत का कहना है कि हमने अखबारों में पढ़ा है, लोगों से भी सुना है कि  सरकार पहले भी कई बच्चों का मुफ्त इलाज करवाई है,जिससे उन्हें जीवनदान मिला है,यह सब सरकार की देन है। मुझे पूरा भरोसा है कि मेरा बेटा जल्द स्वस्थ होकर घर लौटेगा। विनोद भगत ने बताया कि उनकी आर्थिक स्थिति प्राइवेट में इलाज कराने की नहीं है, बच्चों का इलाज सरकार के सहयोग से ही संभव है।

आंगनबाड़ी व विद्यालयों में की जा रही है स्क्रीनिंग

सीएस डॉ अंजनी कुमार ने कहा कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत बिहार सरकार बाल हृदय योजना संचालित कर रही है। इस योजना के तहत 18 वर्ष तक के बच्चों का निःशुल्क इलाज कराया जा रहा है। बच्चों में होने वाले कुल 41 रोगों के निःशुल्क इलाज का प्रावधान है। इनमें चर्म रोग, दांत व आंख संबंधी रोग, एनीमिया, हृदय संबंधी रोग, श्वसन संबंधी रोग, जन्मजात विकलांगता, बच्चे के कटे होंठ व तालू संबंधी रोग शामिल हैं। बीमार बच्चों को चिह्नित करने के लिए आरबीएसके टीम द्वारा जरूरी स्वास्थ्य परीक्षण किया जाता है।

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शून्य से छह साल तक के बच्चों में रोग का पता लगाने के लिए आंगनबाड़ी व स्वास्थ्य केंद्रों में छह से 18 साल तक के बच्चों में रोग का पता लगाने के लिए विद्यालय स्तर पर स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन नियमित अंतराल पर किया जाता है। उन्होंने बताया कि आरबीएसके के तरत 41 तरह की बीमारियों का इलाज बिल्कुल ही नि:शुल्क उपलब्ध है।

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