जेल की यातनाएं और भूखे रहकर खलील अहमद ने फूंका था आजादी के लिए बिगुल

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बक्सर/केसठ (गिरीश कुमार द्विवेदी) : देश को आजाद कराने को लेकर क्रांतिकारी वीरों ने अगस्त 1942 को अंग्रेजों के खिलाफ बिगुल फूंक दिया था. शहर से लेकर गांव तक लोगों ने विरोध एकजुट होकर कर दिया था. सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों एवं शिक्षकों ने भी इस आंदोलन में भरपूर सहयोग किया था. पूरे देश में अंग्रेजों के विरुद्ध लड़ाई चल रही थी. इसी तरह यह क्रांति की आग केसठ पहुंची थी.

जहां देश को आजाद कराने को लेकर आजादी के कई दीवानों ने अपनी जान की कुर्बानी दे दी, तो कई जीवित रहे. जिन्होंने देश को आजाद होते देखा था. उस समय आजादी के दीवानों का रोम रोम खुशी से झूम उठा था और आंखों से खुशी के आंसू निकल पड़े थे.

प्रभावित होकर गांव की दर्जनों युवक साथ हो गए

इसी दौरान प्रखंड के रामपुर गांव मे 19 अप्रैल 1922 को जन्मे खलील अहमद अंसारी प्राथमिक शिक्षा गांव में ही प्राप्त करने के बाद उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए हाई स्कूल मुरार गए. एक दिन रोज की तरह बस्ता लेकर स्कूल के लिए खलील अहमद अंसारी घर से निकले थे. लेकिन वह दिन ऐतिहासिक बन गया था. स्कूल में शिक्षकों ने जानकारी दी कि देश में महात्मा गांधी का सत्याग्रह आंदोलन चल रहा है. इससे प्रभावित होकर स्कूल के कई बच्चों ने एकजुट होकर इस आंदोलन में शामिल हो गए थे और अंग्रेजों के खिलाफ देश को आजाद कराने के लिए बिगुल फूंक दिया था. इससे प्रभावित होकर गांव की दर्जनों युवक साथ हो गए थे.

स्वतंत्रता सेनानी खलील अहमद अंसारी

सरकारी बंगला और डाकघर को किया था आग के हवाले

खलील अहमद अंसारी की जंग अंग्रेजों के विरुद्ध शुरू हो चुका था.जिसे लोगों का भरपूर सहयोग भी मिल रहा था. इसी दौरान अपने गांव के नजदीक सिद्धिपुर नहर विभाग का बंगला और मुरार में डाकघर पर हमला कर आग के हवाले कर दिया था. यह कारवां आगे बढ़ा और डुमरांव में रेल की पटरियों को उखाड़ कर आवागमन को प्रभावित कर दिया था. यही नहीं युवक ने अपने मित्रों के साथ मिलकर विदेशी कपड़ों को जलाकर विरोध करना शुरू कर दिया था. इस करामात से अंग्रेज बौखला गए थे. अंग्रेजों ने गोली मार देने का आदेश जारी कर दिया था.

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जेल में कई दिनों तक रहना पड़ा था भुखे

देश को आजाद कराने को लेकर क्रांतिकारी दीवाने को पकड़ने के लिए अंग्रेजों ने अपना अभियान छेड़ दिया था. जिसको लेकर खलील अहमद अपने मित्रों के साथ छिप-छिपकर कई दिनों तक भूखे रहे थे. इस दौरान गिरफ्तारी का वारंट अंग्रेजों ने जारी कर दिया था .ऐसी स्थिति में घर परिवार को छोड़कर गांव-गांव घूमकर अपने देश की रक्षा को लेकर अभियान जारी था. अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आंदोलन करने वाले खलील अहमद अंसारी बक्सर की जेल में छः महीने तक रखा गया था.जहां उन्हें विभिन्न प्रकार की यातनाएं दी गई थी. कोड़े बरसाकर कई दिनों तक भूखे रखा गया था. इसके बावजूद भी उनका हौसला कम नहीं हुआ था.

स्वतंत्रता सेनानी खलील अहमद अंसारी का पैतृक मकान

पेड़ काट कर अंग्रेजों का रोका था नहर मार्ग

अगस्त क्रांति के दौरान खलील अहमद अंसारी ने साथियों के साथ मिलकर अंग्रेजों के आने जाने वाले डुमरांव राजवाहा नहर के रास्ते को रोक दिया था. ताकि अंग्रेज आगे नहीं बढ़ सके. इसी दौरान साथियों के साथ मिलकर अंग्रेजों पर हमला कर दिया था.कई अंग्रेज घायल हो गए थे और कई मित्रों को पकड़कर अंग्रेज ले गए थे. इस बार भी खलील अहमद अंसारी भागने में सफल रहे थे. इस प्रकार फिरंगियों का सामना करते हुए आजादी के दीवानों ने अपने घर परिवार को छोड़कर भटकते फिरते थे.

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