डुमरांव : बांके बिहारी मंदिर में राज परिवार ने झांकियों की डाली परंपरा, आज भी निर्वाहन जारी

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डुमरांव. बांके बिहारी मंदिर में रविवार सेझांकी निकलनी शुरू हो गई है, जो रक्षाबंधन के दिन तक अलग-अलग भगवान श्री कृष्ण की लीलाओं को काठ की मूर्तियों के माध्यम से दिखाया जाएगा. लीलाओं में भगवान कृष्ण का जन्म, पुतना वध, चीर हरण, शेषनाग के सीर पर नृत्य, गोपियों के साथ रासलीला सहित विभिन्न लीलाओं को आर्कषण रूप में सजा देखने को मिलता है. सोमवार को जेल में भगवान का जन्म होने के साथ वासुदेव मथुरा के लिए प्रस्थान करने का दृश्य दिखाय गया.

श्रद्धालूओं के लिए आकर्षण का केंद्र रहा

यह देखने के लिए सुदूर क्षेत्र से लोग अपने रिश्तेदारों के यहां आकर यह दृश्य देखते हैं. इस दरम्यान नगर पंचित मां काली, लाला टोली रोड स्थित राजराजेश्वरी त्रिपुर सुन्दरी भगवती मंदिर, रक्षा बंधन के दिन नगर देवी डुमरेजनी वार्षिकोत्सव पूजन भव्य तरीके से होता है. इस सभी जगह मेला लगता है. मंदिर पुजारी ने बताया कि सोमवार को भगवान कृष्ण का जन्म और पुतना का वध दिखाया गया. श्रद्धालूओं के लिए आकर्षण का केंद्र रहा.

सावन माह में 13 दिनों तक कृष्ण के अलग-अलग लीलाओं

बताते चलें कि सावन माह में 13 दिनों तक मंदिर परिसर में कृष्ण के अलग-अलग लीलाओं को प्रस्तुत किया जाता है, जो रक्षाबंधन पूर्णिमा के दिन समापन हो जाता है. प्रतिदिन सोमवारी देखने के लिए सुदूर इलाके से लोग अपने रिश्तेदारों के यहां पहुंचते हैं और मंदिर परिसर में इस दृश्य को देखते हैं. क्योंकि यह भगवान की अलग-अलग लीलाएं मंदिर परिसर में सावन माह में देखने को मिलता है. राजगढ़ के बाहर मेला जैसा दृश्य देखने को मिलता है. ऐतिहासिक राजगढ़ स्थित बांके बिहारी मंदिर में भगवान कृष्ण की कई रूपों में सजी झांकियों को देख लोग झूम उठते है.

100वर्ष पूर्व में महाराजा केशव प्रसाद सिंह ने डाली थी नींव

राज घराने द्वारा स्थापित इस मंदिर में झांकी की परंपरा सैकड़ों वर्ष पहले शुरू किया गया था. राज परिवार के इस अनोखी परपंरा के निर्वाहन कोलेकर राजपुरोहित भी तत्पर रहते है. झांकी की पहले ही शुरू हो जाती है. सावन के महिने में मंदिर की अनोखी छटा बांके बिहारी मंदिर की नींव 100वर्ष पूर्व में महाराजा केशव प्रसाद सिंह ने डाली थी. मंदिर में भगवान कृष्ण की स्वर्ण जड़ित प्रतिमा को स्थापित किया गया है. मंदिर का मुख्य दरवाजा चांदी से सुशोभित है. मंदिर परिसर के चारों ओर रंग बिंरगे फूलों से सजी क्यारियां खुशबु बिखेरती है. इसके अलावे पानी के फुहारे और भी आकर्षण दिखते है. चारों बगल पेड़ पौधों के बीच अन्य मंदिर की स्थापना से यह मंदिर परिसर भक्तिमय से भरा रहता है. झांकियों के दृश्य में कई तरह के जंगल और काठ से बनी जानवरों का जमवाड़ा लगाया जाता है.

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