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वीर कुंवर सिंह कृषि कॉलेज में विश्व मृदा दिवस पर कृषक गोष्ठी सहित अन्य कार्यक्रमों आयोजित

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डुमरांव. वीर कुंवर सिंह कृषि कॉलेज में सोमवार को विश्व मृदा दिवस पर कृषक गोष्ठी सहित अन्य कार्यक्रमों का आयोजन किया गया. इस अवसर पर कृषि कॉलेज, डुमरॉव और कृषि अभियंत्रण महाविद्यालय आरा के छात्र -छात्राओं के बीच निबंध और प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिताओं का आयोजन मिट्टी के महत्व के बारे में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से किया गया. प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का विषय इस वर्ष संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित विश्व मृदा दिवस का थीम ‘मृदा, जहां भोजन शुरू होता है ‘को रखा गया. जबकि निबंध का विषय ‘ मृदा प्रदूषण और इसका निदान रखा गया. प्रश्नोत्तरी और निबंध प्रतियोगिता में कृषि कॉलेज और कृषि अभियंत्रण कॉलेज आरा के क्रमशः 26 व 21 मेधावी छात्र छात्राओं ने भाग लिया.

प्रश्नोत्तरी और निबंध प्रतियोगिता में प्रथम द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को आगामी गणतंत्र दिवस पर पुरुस्कृत किया जाएगा. कृषि कॉलेज के प्राचार्य डॉ रियाज अहमद ने छात्र-छात्राओं से कहां कि आप लोग कृषि दूत बनकर अपने गांव के आसपास के किसानों में मिट्टी के स्वास्थ्य को अच्छा बनाए रखने के बारे में प्रचार प्रसार करें. इस मौके पर मृदा वैज्ञानिक डॉ बीरेन्द्र सिंह ने छात्र-छात्राओं को विश्व मृदा दिवस मनाने के इतिहास और महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी. मौके पर कॉलेज के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ धनंजय कुमार सिंह, डॉ शांति भूषण, डा. प्रभात कुमार, डा. राजकुमार शाह, डा. उदय कुमार, प्रो. पवन शुक्ला, इं. विकास चंद्र वर्मा, प्रो. शिव कुमार चौधरी, प्रो. सुबोध कुमार प्रो. अविनाश सरीन सक्सेना आदि उपस्थित रहे.

साथ ही साथ इस अवसर पर किसानों में मिट्टी के महत्व के बारे में जागरूकता और उसके स्वास्थ्य अच्छा बनाए रखने के उद्देश्य से सुरौंधा गांव में एक किसान गोष्ठी का आयोजन भी किया गया. जिसमें किसानों ने बड़े उत्साह के साथ बढ़ चढ़कर भाग लिया. गोष्ठी में मृदा विज्ञान के विभागाध्यक्ष डॉ बीेरेन्द्र सिंह ने मृदा प्रदूषण के कारण, दुष्प्रभाव और निदान पर विस्तारपूर्वक किसानों को जानकारी दी. डॉ वीरेन्द्र सिंह ने बताया कि अंधाधुंध रासायनिक खादों और जहरीले कीटनाशकों के प्रयोग से जैविक तंत्र प्रभावित होने से मृदा की उर्वरा शक्ति खराब होने के साथ-साथ वातावरण भी प्रदूषित होता है. उन्होंने कहा कि अनुसंधानों से प्रमाणित हो चुका है कि खाद्य पदार्थों में उपस्थित कीटनाशकों के रासायनिक तत्व भोजन के माध्यम से मानव शरीर में पहुंच जाते हैं. जिसके फलस्वरूप कैंसर, अनुवांशिक विकार उत्पन्न होते हैं.

बाजार में उपलब्ध प्राय: हर खाद्य सामग्री जैसे अनाज फल सब्जियां दूध रसायनिक कीटनाशकों से प्रदूषित है. मृदा प्रदूषण कम करने के लिए डॉ सिंह ने समेकित पोषक तत्व प्रबंधन और समेकित कीट प्रबंधन अपनाने के लिए किसानों को कहा. गोष्ठी में सस्य विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ उदय कुमार ने जैविक खेती के बारे में विस्तृत जानकारी दी. मृदा वैज्ञानिक प्रोफेसर अविनाश सरीन सक्सेना ने मिट्टी नमूना लेने की विधि और इसके महत्व पर प्रकाश डाला. प्रो. सुबोध कुमार ने प्राकृतिक संसाधनों को बचाए रखने पर बल दिया. जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधन संरक्षित रह सकें.

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