मलेरिया पर नियंत्रण के लिए प्रशिक्षित की जाएंगी आशा कार्यकर्ताएं

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बक्सर, 07 फरवरी | मौसम में बदलाव के साथ जिले में मच्छरों का प्रकोप बढ़ने की संभावना है। जिले में मलेरिया पर प्रभावी नियंत्रण को लेकर जरूरी प्रयास किये जा रहे हैं। ऐसे में मच्छरों के प्रकोप से बचने और मच्छर जनित रोगों से लोगों के बचाव की तैयारी शुरू कर दी गई है। इस क्रम में मलेरिया जांच व प्रबंधन को लेकर आशा कार्यकर्ताओं को दक्ष बनाया जाएगा। जिसके लिए उन्हें प्रखंडवार प्रशिक्षित किया जाएगा। ताकि, उन्हें मलेरिया के लक्षण, जांच और इलाज की जानकारी दी जा सके।

प्रशिक्षण में आशा कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण के दौरान बताया जाएगा कि जिन लोगों को मलेरिया होता है उन्हें आमतौर पर तेज बुखार और कंपकंपी के साथ बुखार आता है। मलेरिया का वक्त पर इलाज होना जरूरी है। मलेरिया प्लाज्मोडियम परजीवी की वजह से होता है और परजीवी संक्रमित मादा एनाफिलीज मच्छरों के काटने से लोगों में विशेष रूप से फैलता । इसलिए आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से लोगों को साफ-सफाई के संबंध में भी जागरूक करने पर जोर दिया जाएगा।

लक्षणों के आधार पर रोग की पहचान आसान

जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ. शैलेंद्र कुमार ने बताया, मलेरिया के कई लक्षण हैं। लेकिन एक ही मरीज में सभी लक्षण दिखे यह जरूरी नहीं है। अमूमन बुखार आना, सिरदर्द, उल्टी होना, , ठंड लगना, चक्कर आना सहित अन्य अन्य रोग के प्रमुख लक्षण हैं। कोई भी साधारण बुखार मलेरिया हो सकता है। रोगी के ब्लड सैंपल की जांच से रोग का पता आसानी से लगाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि रोग से बचाव के कई आसान उपाय हमारे पास उपलब्ध हैं। इसमें मच्छरदानी का प्रयोग, आस-पास के माहौल की स्वच्छता का ध्यान रखना, जलजमाव की स्थिति पैदा न होने देना, घर के अंदर मच्छर मारने वाली दवा का प्रयोग, मच्छर के घर में प्रवेश को रोकने के लिये खिड़कियों पर जाली का प्रयोग सहित अन्य उपाय किये जा सकते हैं।

रोग के बारे में समुचित जानकारी देना प्रशिक्षण का उद्देश्य

जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण सलाहकार राजीव कुमार ने बताया, आशा कार्यकर्ताओं को मलेरिया रोग से समुचित जानकारी देना प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य है। ताकि अपने पोषक क्षेत्र में किसी व्यक्ति में ऐसे लक्षण दिखने व तत्काल जांच के बाद उनका इलाज शुरू करा सकें। उन्होंने बताया डब्ल्यूएचओ के आंकड़ों के मुताबिक देश में हर साल मलेरिया की वजह से 2 लाख लोगों की मौत होती है। इसका सबसे अधिक शिकार 05 से 14 साल के बच्चे होते हैं।

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मलेरिया रोग पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित कर शिशु मृत्यु दर में कमी लायी जा सकती है। कोई भी बुखार मलेरिया हो सकता है। इसलिए बुखार आने पर सबसे पहले जांच करनी चाहिए व पॉजिटिव होने पर पूरा उपचार लेना चाहिए। मलेरिया से बचाव के लिए हमें अपने घर के आसपास पानी जमा नहीं होने देना चाहिए। जहां पानी जमा है वहां पर मिट्टी का तेल डालना चाहिए। मच्छरदानी का नियमित उपयोग करना चाहिए और फुल बांह के कपड़े पहनने चाहिए।

मलेरिया के लक्षण

बुखार आना

सिर दर्द होना

उल्टी होना

– ठंड लगना

चक्कर आना

थकान होना

पेट दर्द

तेज से सांस

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