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डुमरांव : वीर कुंवर सिंह कृषि कॉलेज में फसल अवशेष (बायोमास) पैलेट्स के उपयोग विषयक जागरूकता संवर्धन कार्यक्रम आयोजित

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डुमरांव. वीर कुंवर सिंह कृषि कॉलेज स्थित बहुद्देशीय भवन में शुक्रवार को जलवायु अनुकूल कृषि कार्यक्रम अंतर्गत कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्र में फसल अवशेष (बायोमास) पैलेट्स के उपयोग विषयक जागरूकता संवर्धन कार्यक्रम आयोजित किया गया. जिसका उद्घाटन बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर भागलपुर के कुलपति अरुण कुमार,  सुदीप नाग मिशन निदेशक विद्युत मंत्रालय भारत सरकार, एसके श्रीवास्तव निदेशक राष्ट्रीय विद्युत प्रशिक्षण प्रतिष्ठान पूर्वी क्षेत्र दुर्गापुर भारत सरकार, डॉ आर एन सिंह निदेशक प्रसार शिक्षा बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर, डॉ फिजा अहमद सह निदेशक शोध बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर, डॉ राजेश कुमार अधिष्ठाता कृषि, बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर, कॉलेज प्राचार्य डॉ रियाज अहमद ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया.

इससे पहले मुख्य अतिथि सहित अन्य अतिथि गांव का स्वागत अंग वस्त्र व मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया. कार्यक्रम के दौरान नवनिर्मित बीज भंडार भवन का उद्घाटन बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर के कुलपति डॉ अरुण कुमार ने किया. कार्यक्रम के दौरान पुराने समय में पराली, किसान पराली क्यों जलाते हैं, पर्यावरण, स्वास्थ्य एवं सुरक्षा, पराली के आगे उपयोग के लिए कटाई और रूपांतरण, क्षेत्रीय विकास लाभ, जीत का स्थिति सहित अन्य मुख्य विषयों पर चर्चा हुआ. कार्यक्रम में 8 जनपदों भोजपुर, रोहतास, पटना, जहानाबाद, गया, अरवल तथा औरंगाबाद से 150 किसानों ने भाग लिया. उपस्थित अतिथियों व वक्ताओं ने कहा कि पराली किसान ना जलाएं, उससे कमाने का प्रयास करें. पराली जलने से होने वाले प्रदूषण का असर मनुष्यों की सेहत पर पड़ा है, पराली या अन्य फसल अवशेषों को जलाने से मिट्टी की उर्वरता शक्ति नष्ट हो जाती है. जिसमें नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटेशियम एवं अन्य सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी हो जाती है.

आगे बताया कि बायोमास को फायरिंग से जुड़े क्षेत्रीय विकास लाभ, विशेष रुप से बायोमास की कटाई, प्रसंस्करण और परिवहन से जुड़े रोजगार के नए अवसरों का सृजन, और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं के लाभ पर प्रवाह। पराली इकट्ठा करने से परिवहन संग्रह बिंदु, बायोमास तथा प्रसंस्करण केंद्र के कई लोगों को रोजगार मिलता है. यह सभी हिट धारकों के लिए जीत की स्थिति है किसान की आमदनी होगी, बिजली इकाइयों को बिना किसी परिवहन परेशानी के बने बनाए इंधन की आपूर्ति मिलेगी और सरकार सरकारी खजाने पर बिना किसी दबाव के प्रदूषण को कुछ हद तक कम कर सकेंगी. कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अतिथियों व वक्ताओं ने बताया की खेतों में पराली जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण की समस्या का समाधान करने और ताप विद्युत उत्पादन के कार्बन फुटप्रिंट को कम करने के लिए, विद्युत मंत्रालय ने कोयला आधारित ताप विद्युत संयंत्रों में बायोमास के उपयोग पर एक राष्ट्रीय मिशन स्थापित करने का निर्णय लिया है.

यह देश में ऊर्जा संक्रमण और स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों की ओर बढ़ने के हमारे लक्ष्यों का और समर्थन करेगा. ताप विद्युत संयंत्रों में बायोमास के उपयोग पर राष्ट्रीय मिशन के निम्नलिखित उद्देश्य है,  जिसमें थर्मल पावर प्लांट उसे कार्बन न्यूट्रल बिजली उत्पादन का बड़ा हिस्सा पाने के लिए फायरिंग के अस्तर को वर्तमान 5 प्रतिशत से बढ़कर उच्च स्तर तक ले जाना, बायोमास पेलेट्स में सिलका, छार की अधिक मात्रा को संभालने के लिए वायलर डिजाइन में आर एंड डी गतिविधि शुरू करना, बायोमास पेलेट्स और कृषि और पैसों की आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं को दूर करने और बिजली संयंत्रों तक इसके परिवहन की सुविधा के लिए, बायोमास से फायरिंग में नियामक मुद्दों पर विचार करने के लिए. मंच संचालन डॉ प्रियंका रानी ने किया. मौके पर डॉ आनंद कुमार जैन, डा मणि भूषण ठाकुर, डॉ सुदय प्रसाद, डॉ विनोद कुमार सिंह समेत कॉलेज के अन्य वैज्ञानिक व कर्मी उपस्थित रहे.

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